कैमरा ट्रैपिंग में दिखे 12 बाघ: वनकर्मियों की लीक लोकेशन से शिकारी पहुंचे, 3 बाघों की गई जान

इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) में ‘ऑन डिमांड’ टाइगर किलिंग के संगठित नेटवर्क में अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भले ही तीनों बाघों का शिकार महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर रहने वाले तीन आदिवासी भाइयों ने किया हो, और खाल बेचने की डील कराने वाले बिचौलिए महाराष्ट्र पुलिस के हेड कांस्टेबल व होमगार्ड कर्मी हों। लेकिन, इस पूरी साजिश की सबसे अहम कड़ी वन विभाग का अपना ही अमला है।
पड़ताल में सामने आया है कि बाघ गणना के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरों में जब बाघ कैद हुए, तो विभाग के ही किसी अंदरूनी स्टाफ ने उनकी सटीक लोकेशन शिकारियों तक लीक कर दी थी। इनपुट मिलते ही शिकारियों के लिए बाघों के मूवमेंट पर नजर रखना बेहद आसान हो गया।
नतीजा यह हुआ कि महज एक महीने के भीतर तीन बाघ मार दिए गए और उनकी नीट-एंड-क्लीन खाल उतार ली गई। चौंकाने वाली बात यह भी है कि बाघों के मारे जाने की भनक वन्यजीव महकमे के मैदानी स्टाफ को बहुत पहले लग चुकी थी, जिसे दबाए रखा गया।
आईटीआर में कैमरा ट्रैपिंग के दौरान 12 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो एक सुखद खबर थी। आशंका है कि शिकार हुए बाघों की संख्या और अधिक हो सकती है, लेकिन बदनामी के डर से विभाग असल आंकड़ों को दबाने की कोशिश में जुटा है।
अप्रैल-मई में कैमरों में आए थे बाघ, वहीं से शुरू हुआ ‘किलिंग प्लान’
चूंकि क्षेत्र में नक्सलवाद का असर कम हुआ है, इसलिए अब तक अनछुए रहे इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) में कैमरे लगाना आसान हुआ। मार्च 2026 की स्थिति में प्रबंधन के पास उपलब्ध 55 कैमरों में से सिर्फ 15 जोड़ी कैमरे ही चालू हालत में थे।
तब तय हुआ कि मंढेर बफर जोन में नदी के किनारे-किनारे कैमरा ट्रैपिंग की जाए। इसी बीच प्रबंधन ने 50 नए कैमरे और खरीदे। अप्रैल-मई के दौरान फरसेगढ़ इलाके में लगाए गए कैमरों में जब बाघों की तस्वीरें आईं, तो यह खबर पूरे महकमे में फैल गई। इसी दौरान बाघों ने क्षेत्र में 6 मवेशियों का शिकार भी किया था। बाघों की पुख्ता मौजूदगी की खबर लीक होते ही शिकारियों ने अपना ‘टाइगर किलिंग प्लान’ एक्टिव कर दिया।
पासेवाड़ा रेंज के अमले की भूमिका संदेहास्पद
पैदल गार्ड गिरफ्तार: शिकारी गैंग के सीधे संपर्क में रहने के आरोपी पैदल गार्ड कुंदन मंडावी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
फॉरेस्ट गार्ड सस्पेंड: इसी क्षेत्र के निवासी व यूनियन लीडर फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके निलंबन आदेश में स्पष्ट लिखा है- ‘लापरवाही, उदासीनता और निर्देशों की अवहेलना के कारण यह घटना हुई।’
कैमरा लगाने का क्यों हो रहा था विरोध?
बाघों का शिकार कोर एरिया- बीट पेनगुण्डा में हुआ। दरअसल, जब अफसर कैमरे लगवा रहे थे, तब फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी ने विरोध किया था। स्टाफ विरोध कर रहा था, क्योंकि उसे पता था कि क्षेत्र में शिकारी सक्रिय हैं, जो कैमरों में कैद हो सकते थे।
वन विभाग में सबसे छोटी इकाई ट्रैकर की होती है, जिसके ऊपर ‘बीट गार्ड’ होता है। यही कैमरों को मैनेज करता है और डिप्टी रेंजर को रिपोर्ट करता है। राज्य में स्टाफ की कमी के चलते एक-एक बीट गार्ड के भरोसे 2 से 3 बीट हैं। इसी का फायदा उठाने में शिकारी सफल रहे।
इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली-चंद्रपुर पर पारधी गैंग की नजर
मध्य भारत में कुख्यात तस्कर अजीत पारधी उर्फ अजीत राजगोंड का खौफ है। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, इंटेलिजेंस और राज्यों के वन विभाग के राडार पर मौजूद अजीत पर पिछले दो दशकों में 40 से अधिक बाघों के शिकार का आरोप है। जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर से उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप में हाई अलर्ट जारी किया गया था।
अजीत भले ही चंद्रपुर जेल में बंद हो, लेकिन उसके भतीजों समेत परिवार के कई शातिर सदस्य अब भी फरार हैं। इन शिकारियों के मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के जंगलों में सक्रिय होने की खुफिया रिपोर्ट है।
आशंका जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुए 3 बाघों के शिकार के पीछे इसी पारधी गैंग का हाथ है। इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश की टाइगर स्ट्राइक फोर्स इसी महीने अजीत को जबलपुर ले जाकर कोर्ट में पेश करने वाली है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ का इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली (महाराष्ट्र)-चंद्रपुर वन क्षेत्र देश का एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर है। हाल के दिनों में इस कॉरिडोर में बाघों की आवाजाही काफी बढ़ी है। यही वजह है कि अंतरराज्यीय तस्करों और शिकारियों की पैनी नजर इस बेल्ट पर है।
वाइल्ड लाइफ क्राइम से जुड़ी जांच एजेंसियों के अधिकारियों ने बताया कि ये गिरोह कभी भी बिना वजह शिकार नहीं करते। इनका पूरा नेटवर्क ‘डिमांड और ऑर्डर’ पर चलता है। जैसे ही अंगों की करोड़ों रुपये की डील फाइनल होती है और डिमांड भेजी जाती है, शिकारी गैंग जंगलों में बाघों के पीछे लग जाता है।











