परिजनों ने छोड़ा साथ, अस्पताल कर्मियों ने निभाया परिवार का फर्ज; निराश्रित मरीजों की सेवा बन रही मिसाल

डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में ऐसे कई मरीज भर्ती हैं, जिनके लिए बीमारी से बड़ी चुनौती उनका अकेलापन है। कुछ मरीजों की पहचान नहीं हो पाई है, जबकि कुछ को उनके परिजन अस्पताल में छोड़कर चले गए हैं। ऐसे 15 से 20 निराश्रित मरीजों की देखभाल अस्पताल के वॉर्ड बॉय भरत बुंदेल और उनकी टीम परिवार की तरह कर रही है।
अस्पताल कर्मचारियों की यह टीम अपनी नियमित ड्यूटी पूरी करने के बाद भी मरीजों की सेवा में जुट जाती है। वे मरीजों को नहलाने, कपड़े बदलवाने, बाल और नाखून काटने, शेविंग कराने, डायपर बदलने तथा उनकी व्यक्तिगत स्वच्छता का पूरा ध्यान रखते हैं। अस्पताल के अन्य कर्मचारी भी कपड़े, साबुन, शैंपू, ट्रिमर और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर इस सेवा कार्य में सहयोग दे रहे हैं।
अस्पताल के डिसेबल पीपुल वार्ड में वर्तमान में 15 से 20 ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनका अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं है। कई मामलों में परिजन होने के बावजूद मरीजों को लेने कोई नहीं पहुंचता। ऐसे में अस्पताल कर्मियों ने ही उनकी देखभाल की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है।
भरत बुंदेल ने बताया कि कोरोना काल के दौरान सेवा कार्य करते समय उन्हें महसूस हुआ कि कई मरीजों का इलाज तो हो जाता है, लेकिन उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता। इसी अनुभव के बाद उन्होंने साथियों के साथ मिलकर निराश्रित मरीजों की सेवा का यह अभियान शुरू किया। इलाज पूरा होने के बाद भी जिन मरीजों के परिजन नहीं आते, उन्हें विशेष वार्ड में रखकर उनके परिवार का पता लगाने का प्रयास किया जाता है।
अस्पताल प्रबंधन और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से पिछले कुछ महीनों में 15 से अधिक निराश्रित मरीजों को उनके परिवार तक पहुंचाया जा चुका है। भरत बुंदेल का कहना है कि मरीजों के चेहरे पर लौटती मुस्कान ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
इस सेवा कार्य में जनसंपर्क अधिकारी शुभ्रा सिंह ठाकुर, नम्रता डेनियल, जॉली सुमन, केएल बिरला, सुजाता, ममता साहू, हरिशंकर साहू, दशरथ बेहरा, अमर समुंद्रे, ढलारी नेताम, मंगली जंघेल, रामेश्वर चंद्रा, मनोज बेहरा, बलराम साहू और हेमेश वर्मा सहित कई कर्मचारी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।










