छत्तीसगढ़ में आम की नई किस्मों पर बड़ा शोध, किसानों की आय बढ़ाने के लिए 20 वैरायटी का होगा वैज्ञानिक परीक्षण

छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन देने वाली आम की नई किस्में विकसित करने की दिशा में बड़ा शोध शुरू किया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में 15 से 20 नई वैरायटी पर वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। इस शोध का उद्देश्य ऐसी किस्मों का चयन करना है, जो प्रदेश की जलवायु में बेहतर उत्पादन दें और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हों।

अनुसंधान के तहत पौधों की वृद्धि, फल की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और स्थानीय मौसम के अनुकूलता का परीक्षण किया जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि शोध सफल रहा तो करीब छह वर्ष बाद प्रदेश को नई और उन्नत आम की किस्में मिल सकेंगी, जिनके पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में आम की करीब 85 किस्मों का संरक्षण किया गया है। इनमें लंगड़ा, दशहरी, अल्फांसो, आम्रपाली, नीलम, सुंदरजा, सिंदूरी, मल्लिका और तोतापरी जैसी 65 पारंपरिक किस्मों पर अध्ययन पूरा हो चुका है। अब टॉमी एटकिन, सेंसेशन, हुसनारा, स्वर्णरेखा, अर्कापुनीत, जहांगीर, हल्दी खास, कोहिनूर, गुलाब खास और बनराज जैसी नई किस्मों पर फील्ड स्तर पर शोध शुरू किया गया है।

वैज्ञानिक इन नई किस्मों में पौधों की वृद्धि, फूल और फल आने का समय, स्वाद, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का विस्तृत मूल्यांकन करेंगे। अनुसंधान का उद्देश्य ऐसी वैरायटी तैयार करना है जो व्यावसायिक खेती के लिए अधिक लाभदायक होने के साथ स्थानीय जलवायु में भी बेहतर प्रदर्शन करें।

विशेषज्ञों के अनुसार आम का उपयोग केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं, बल्कि अचार, जैम, जेली, जूस, टॉफी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण में भी होता है। बेहतर गुणवत्ता वाली नई किस्मों के विकसित होने से प्रसंस्करण उद्योग को भी फायदा मिलेगा और किसानों के लिए नए बाजार उपलब्ध होंगे।

वैज्ञानिकों का कहना है कि उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है। अब बाजार में आकर्षक रंग, बेहतर स्वाद, बड़े आकार और उच्च गुणवत्ता वाले आमों की मांग बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई वैरायटी पर शोध किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसान आधुनिक किस्मों की खेती कर अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकें।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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