हाईकोर्ट की राज्य सरकार को फटकार, आवारा कुत्तों और मवेशियों के प्रबंधन पर मांगी 22 सितंबर तक नई रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के एसओपी पर उठाए गए कदम की मांगी जानकारी
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने कोर्ट के पूर्व निर्देशों के पालन में शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि आवारा पशुओं और कुत्तों के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। इस पर डिवीजन बेंच ने सरकार के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि मामला सीधे आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने कहा- योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, मानिटरिंग भी हो
कोर्ट ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी जिलों में इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और उनकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए। सड़क हादसों और रेबीज जैसी गंभीर समस्याओं को देखते हुए इस विषय पर निरंतर कार्रवाई जरूरी है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राज्यभर में किए गए कार्यों और उनकी प्रगति का अद्यतन ब्यौरा नए शपथपत्र के माध्यम से 22 सितंबर 2026 तक प्रस्तुत करें। अब अगली सुनवाई में कोर्ट राज्य सरकार की प्रगति रिपोर्ट का परीक्षण करेगा।











