फ्रीलांसर्स ध्यान दें! ITR फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक, जानिए सही फॉर्म चुनने और टैक्स बचाने का पूरा गणित

अगर आप फ्रीलांसर हैं और अपनी प्रोफेशनल सर्विस देकर कमाई करते हैं, तो समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना आपके लिए जरूरी है. असिस्टेंट ईयर(AY) 2026-27 के लिए जिन लोगों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है. वहीं, जिन मामलों में टैक्स ऑडिट जरूरी है, उनके लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की गई है, जब तक सरकार इसमें कोई बदलाव न करे.टैक्स और निवेश विशेषज्ञ निशांत शंकर के मुताबिक, फ्रीलांसरों को अपनी कमाई और टैक्स व्यवस्था के आधार पर सही ITR फॉर्म चुनना चाहिए.
फ्रीलांसर कौन-सा ITR फॉर्म भरें?
अगर आप अपनी आय का पूरा हिसाब-किताब और अकाउंट बुक्स रखते हैं, तो आपको ITR-3 भरना होगा. अगर आप Section 44ADA के तहत प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम चुनते हैं, जिसमें तय नियमों के अनुसार आय मानी जाती है और ज्यादा रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं होती, तो ITR-4 आपके लिए सही रहेगा.
फ्रीलांस आय कैसे दिखाएं?
फ्रीलांस से होने वाली कमाई को ITR में बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के तहत दिखाना होता है.
- रिटर्न भरने से पहले अपनी कमाई का मिलान इन दस्तावेजों से जरूर कर लें
- जारी किए गए इनवॉइस और मिली हुई पेमेंट
- बैंक स्टेटमेंट
- Form 26AS और Annual Information Statement (AIS)
- TDS सर्टिफिकेट
- अकाउंट बुक्स या दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड
अगर आपकी कमाई विदेशी क्लाइंट से हुई है, तो बैंक में आए विदेशी भुगतान का रिकॉर्ड भी जांच लें. इससे ITR में दी गई जानकारी और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर नहीं रहेगा और नोटिस आने की संभावना कम होगी.
फ्रीलांस आय पर टैक्स कैसे लगता है?
फ्रीलांस से हुई कमाई को बिजनेस या प्रोफेशन की आय माना जाता है. इसमें जरूरी प्रोफेशनल खर्च घटाने के बाद बची राशि पर टैक्स लगता है. कितना टैक्स देना होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सा टैक्स सिस्टम चुना है.
प्रिजम्पटिव टैक्स या रेगुलर टैक्स, क्या चुनें?
अगर आप Section 44ADA के लिए पात्र हैं, तो प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम चुन सकते हैं. इसमें कम रिकॉर्ड रखने पड़ते हैं और ITR भरना आसान हो जाता है.
लेकिन अगर आपके काम से जुड़े खर्च ज्यादा हैं, तो रेगुलर टैक्स सिस्टम आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें वास्तविक खर्चों की कटौती का लाभ मिलता है.
कौन-कौन से खर्च घटाए जा सकते हैं?
रेगुलर टैक्स सिस्टम में फ्रीलांसर अपने काम से जुड़े खर्चों की कटौती ले सकते हैं, जैसे-
- ऑफिस का किराया
- इंटरनेट और मोबाइल/फोन बिल
- सॉफ्टवेयर का खर्च
- प्रोफेशनल फीस
- काम से जुड़ा यात्रा खर्च
- बिजनेस में इस्तेमाल होने वाली संपत्ति पर(Depreciation)
- कर्मचारियों पर होने वाला खर्च
- ध्यान रखें कि निजी खर्चों पर टैक्स छूट नहीं मिलती
अगर विदेशी क्लाइंट से कमाई हो तो क्या करें?
अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशी क्लाइंट से कमाई करते हैं, तो आमतौर पर उस आय पर भारत में टैक्स देना पड़ सकता है.
- इसके लिए आपके पास ये दस्तावेज होने चाहिए
- क्लाइंट के साथ किया गया एग्रीमेंट
- इनवॉइस
- बैंक भुगतान का रिकॉर्ड
- विदेशी भुगतान प्राप्त होने का प्रमाण (जहां लागू हो)
अगर उसी आय पर विदेश में पहले ही टैक्स कट चुका है, तो भारत और उस देश के बीच लागू DTAA (Double Taxation Avoidance Agreement) के तहत दोहरी टैक्स वसूली से राहत मिल सकती है. किसी भी निर्णय से पहले टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि नियम समय-समय पर बदल सकते हैं.











