ईरान ने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ को क्यों बदला? रेजाई को कमान मिलने से क्या संदेश?

ईरान ने मोहम्मद बाघेर जोलगद्र की जगह लंबे समय तक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर रहे मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बनाया है. रेजाई को परिषद में सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई का प्रतिनिधि भी बनाया गया है. जोलगद्र को हटाया नहीं गया है. उन्हें सर्वोच्च नेता का राजनीतिक सलाहकार बनाया गया है. वह कुछ महीने पहले ही सुरक्षा परिषद के सचिव बने थे. उनसे पहले अली लारीजानी इस पद पर थे, जिनकी मार्च में हवाई हमले में मौत हो गई थी.

ईरान ने ऐसे समय में अपनी सबसे अहम सुरक्षा संस्था में बड़ा बदलाव किया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत निर्णायक दौर में है. आइए जानते हैं रेजाई की नियुक्ति की 5 बड़ी वजहें…

1. होर्मुज पर सख्त रुख के बीच बड़ा बदलाव

इस बदलाव को समझने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व समझना जरूरी है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल समुद्री रास्तों में से एक है. ईरान इसे अमेरिका पर दबाव बनाने के बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है. जोलगद्र ने शनिवार को कहा था कि होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटानी होगी, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा और प्रतिबंध हटाने होंगे. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इसी सख्त रुख का समर्थन किया था.

जुलाई 2026 में रेजाई ने भी कहा था कि अमेरिका के साथ संघर्ष के बीच होर्मुज पर नियंत्रण दर्जनों परमाणु बमों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. ऐसे में उनकी नियुक्ति को संकेत माना जा रहा है कि ईरान इस समुद्री रास्ते को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक नीति के केंद्र में रखना चाहता है.

2. रेजाई का 16 साल का युद्ध अनुभव

71 साल के रेजाई ईरान के सबसे अनुभवी सैन्य नेताओं में गिने जाते हैं. उन्होंने 1981 से 1997 तक करीब 16 साल तक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान संभाली. उनका कार्यकाल ईरान-इराक युद्ध के बड़े हिस्से के दौरान रहा. वह पिछले चार दशकों से ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था में अहम पदों पर रहे हैं और कई बार राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं. फरवरी में अली खामेनेई की अमेरिकी-इजराइली हमलों में मौत के बाद रेजाई को मुज्तबा खामेनेई का सैन्य सलाहकार बनाया गया था. ऐसे समय में उनकी नियुक्ति बताती है कि ईरान युद्ध और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अनुभवी सैन्य नेतृत्व को ज्यादा महत्व दे रहा है.

4. पेजेशकियन और कट्टरपंथी धड़े के बीच संतुलन?

इस बदलाव का एक दूसरा पहलू ईरान की आंतरिक राजनीति भी है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, कट्टरपंथी धड़ा अमेरिका के सामने ज्यादा सख्त रुख की वकालत करता रहा है.

जोलगद्र और सरकार के बीच कुछ नीतिगत मतभेदों की भी खबरें सामने आई थीं. ऐसे में उनकी जगह रेजाई जैसे मिलिट्री बैकग्राउंड वाले नेता की नियुक्ति को आंतरिक शक्ति संतुलन की कोशिश माना जा रहा है. इससे संसद के अध्यक्ष और पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के प्रभाव को भी संतुलित किया जा सकता है.

5. खामेनेई की पकड़ मजबूत करने का संकेत

रेजाई को सिर्फ सुरक्षा परिषद का सचिव नहीं बनाया गया है, बल्कि उन्हें परिषद में सर्वोच्च नेता का प्रतिनिधि भी बनाया गया है. इससे सुरक्षा मामलों में मुज्तबा खामेनेई की सीधी पकड़ मजबूत होती है. राजनीतिक विश्लेषक सईद लैलाज के मुताबिक, युद्ध के हालात और सर्वोच्च नेता तक सीमित पहुंच के कारण ईरान से अलग-अलग संदेश सामने आ रहे हैं. राष्ट्रपति पेजेशकियन ने होर्मुज समझौते को सही समय बताया है, लेकिन रेजाई की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि बातचीत के साथ-साथ ईरान अपनी सैन्य और रणनीतिक स्थिति को भी कमजोर नहीं करना चाहता.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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