लाश नहीं मिली फिर भी पुलिस इंस्पेक्टर को उम्रकैद, 40 गवाहों के मुकरने के बाद भी ऐसे साबित हुआ हत्या का मामला

गुजरात के करजन में 2021 के स्वीटी पटेल हत्याकांड में पुलिस इंस्पेक्टर ए.ए. देसाई को अदालत ने हत्या और सबूत मिटाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में न तो स्वीटी का शव बरामद हुआ और न ही 128 में से 40 से ज्यादा गवाह अपने पुराने बयानों पर कायम रहे। इसके बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियों के आधार पर अदालत ने देसाई को दोषी माना। अदालत ने उन पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

गहनों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़ी अहम कड़ियां

मामले की जांच के दौरान वडोदरा के पास एक बंद होटल से जली हुई हड्डियां, राख, नाइटगाउन और पिघले हुए सोने के गहने बरामद हुए थे। हड्डियां इतनी बुरी तरह जल चुकी थीं कि उनका डीएनए परीक्षण संभव नहीं हो सका। हालांकि, फॉरेंसिक जांच में बरामद गहनों का मिलान स्वीटी की तस्वीरों में दिखाई देने वाले गहनों से किया गया। इन्हीं साक्ष्यों को अभियोजन की कहानी में महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।

जांच में पुलिस इंस्पेक्टर देसाई और होटल मालिक कीरितसिंह जडेजा की मोबाइल लोकेशन से जुड़े तथ्य भी सामने आए। अदालत ने घटनाओं के क्रम, मोबाइल लोकेशन, वाहन की स्थिति और होटल से मिले साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़कर देखा। अदालत के मुताबिक, ये परिस्थितियां महज संयोग नहीं थीं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, स्वीटी और देसाई के बीच संबंध थे और स्वीटी उनसे अपने रिश्ते को सामाजिक और कानूनी मान्यता देने की मांग कर रही थी। 4 और 5 जून 2021 की रात दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोप है कि देसाई ने स्वीटी की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को जडेजा के बंद पड़े होटल में ले जाकर जलाने का आरोप लगाया गया।

40 से ज्यादा गवाह मुकर गए, फिर भी अदालत ने माना केस साबित

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 128 गवाहों से पूछताछ की, लेकिन 40 से अधिक गवाह बाद में अपने बयानों से मुकर गए। इनमें स्वीटी का भाई जयदीप पटेल भी शामिल था, जिसने शुरुआत में देसाई पर गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में अदालत में उसने अपना बयान बदल दिया।

अदालत ने माना कि गवाहों के मुकरने से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला खत्म नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अगर जांच अधिकारी की गवाही भरोसेमंद और अडिग रहती है तो पंच गवाहों के मुकरने मात्र से बरामदगी और अन्य साक्ष्य अप्रासंगिक नहीं हो जाते।

अदालत ने यह भी माना कि हत्या के मामले में शव का मिलना अनिवार्य नहीं है। यदि प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह साबित हो जाए कि व्यक्ति की मृत्यु हुई और आरोपी की भूमिका घटनाओं की पूरी श्रृंखला से स्थापित होती है, तो दोषसिद्धि संभव है।

अदालत ने देसाई को हत्या और सबूत मिटाने के अपराध में उम्रकैद तथा 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, होटल मालिक कीरितसिंह जडेजा को सबूत मिटाने में मदद करने का दोषी ठहराते हुए पांच साल की कठोर कारावास की सजा और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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