Sikkim SIR: 2002 की वोटर लिस्ट बनेगी आधार, सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम में SIR के लिए 2002 की वोटर लिस्ट को आधार मानने के चुनाव आयोग के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया. CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सिक्किम के एक संगठन की जनहित याचिका को खारिज कर दिया. याचिका में 2002 की वोटर लिस्ट के इस्तेमाल को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता ने सिक्किम के लिए विशेष व्यवस्था की मांग करते हुए तर्क दिया कि 1979, 1983, 1988 या 1993 में किए गए पिछले ‘इंटेंसिव रिविजन’ को आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सिक्किम की डेमोग्राफिक प्रोफाइल (जनसांख्यिकीय स्थिति) अन्य राज्यों से अलग है और वहां की जनसंख्या के आंकड़े वोटर लिस्ट के आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं. वकील ने लगातार हुए रिविजन के बाद जनसंख्या के आंकड़ों में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया और 2002 को आधार मानने के कारण पर सवाल उठाए.

‘2002 में पहले ही किया जा चुका है एसआईआर’

हालांकि, चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि सिक्किम में 2002 में पहले ही SIR किया जा चुका है और वह आधार के तौर पर आखिरी उपलब्ध SIR वोटर लिस्ट का इस्तेमाल कर रहा है. EC के वकील ने बताया कि 1993 की वोटर लिस्ट में 2002 में अपनाए जाने से पहले कुछ बदलाव और सुधार किए गए थे, इसलिए आयोग आखिरी SIR लिस्ट को ही आधार (बेसलाइन) मानकर काम कर रहा है. EC ने इस याचिका का विरोध इस आधार पर भी किया कि इसे बहुत देर से दायर किया गया है.

उन्होंने तर्क दिया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है. नोटिस जारी किए जा रहे हैं और आपत्तियों पर सुनवाई करके उनका निपटारा किया जा रहा है.

आयोग ने बेंच को ये भी बताया कि दावों और आपत्तियों पर विचार करने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है और अंतिम वोटर लिस्ट 6 सितंबर को प्रकाशित की जानी है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com