अब दोबारा नहीं लौटेगा स्किन कैंसर? पर्सनलाइज्ड वैक्सीन थेरेपी ने जगाई नई उम्मीद

सर्जरी होने के बाद फिर से कैंसर के होने का डर बना रहता है. स्किन कैंसर जिसे मेलेनोमा कहते हैं, इसके मामलों में ऐसा ज्यादा देखा जाता है. पर क्या आप जानते हैं कि मेलेनोमा को दोबारा होने से रोकने के लिए मर्क और मॉडेर्ना की नई वैक्सीन थेरेपी mRNA सफल साबित हुई है. ये स्किन कैंसर के इलाज में एक बड़ी कदम साबित हो सकता है. इसे थरेपी को दो कॉम्बिनेशन से तैयार किया गया है. मॉडेर्ना की पर्सनाइल्जड वैक्सीन इंटिस्मेरन और मर्क की दवा कीट्रूडा के कॉम्बिनेशन से mRNA वैक्सीन थेरेपी को तैयार किया गया है.

दरअसल, फेज 3 किसी भी दवा के इंसानों पर किए जाने वाले टेस्टा का फाइनल और सबसे अहम चरण होता है. इसके बाद दवा को मंजूरी दिए जाने के लिए आगे का प्रोसेस फॉलो किया जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि कि ये वैक्सीन थेरेपी कैसे काम करती है?

वैक्सीन थेरेपी क्यों है खास

ये एक नॉर्मल वैक्सीन नहीं है इसमें मरीज के ट्यूमर के हिसाब से mRNA-बेस्ट पर्सनलाइज्ड कैंसर थेरेपी तैयार की जाती है. ट्रायल के दौरान मरीज के ट्यूमर को टेस्ट करके इसमें मौजूद जेनेटिक चेंजिस यानी म्यूटेशन की पहचान की जाती है. पेशेंट में कैंसर का कौन सा म्यूटेशन है उसी के हिसाब से अलग थेरेपी को तैयार किया जाता है.

इस थेरेपी में इम्यून सिस्टम को इस तरह एक्टिव किया जाता है कि वो कैंसर सेल्स को पहचानता है और उन्हें खत्म करने लगता है. ये वैक्सीन थेरेपी हाई रिस्क कैंसर मरीज जिनकी सर्जरी हो चुकी है उनमें कैंसर के दोबारा लौटने की आंशका को कम करती है.

थेरेपी कैसे करती है काम

आसान भाषा में कहे तो इस mRNA वैक्सीन थेरेपी के जरिए इम्यून सिस्टम को कैंसर के सेल्स पहचानने की ट्रेनिंग दी जाती है. ये कैंसर सेल्स को खत्म करने वाली टी-सेल्स की प्रतिक्रिया को मजबूत करना और बचे हुए कैंसर को दोबारा बढ़ने से रोकना है. फेस-3 INTerpath-001 ट्रायल में स्टेज आईआईबी-आईवी मेलेनोमा कैंसर की वापसी और ज्यादा फैलने का जोखिम कम था. बता दें कि हर पेशेंट के ट्यूमर में म्यूटेशन का पैटर्न अलग हो सकता है.

साइंटिस्ट ऐसे 34 तक म्यूटेशन को एक mRNA वैक्सीन में कोड करते हैं. ये खास तौर पर उसी मरीज के लिए तैयार किया जाता है. इसलिए इसे पर्सनलाइज्ड वैक्सीन थेरेपी कहा जा रहा है.

कैसे किया गया ट्रायल?

इस ट्रायल में हाई रिस्क वाले और सर्जरी से निकाले जा चुके मेलेनोमा वाले 1137 पेशेंट शामिल थे और ये आईआईबी से आईवी तक के मरीज शामिल थे. मरीजों को दो ग्रुप में बांटा गया जिनमें एक ग्रुप को नई वैक्सीन थेरेपी दी गई और दूसरे को सिर्फ कीट्रुडा दी गई. ये प्रोसेस को एक लगा.

ट्रायल में सामने आया कि हाई रिस्क वाले मरीजों में कीट्रुडा काफी नहीं थी. ट्रायल में ये भी देखा गया कि कैंसर दोबारा लौटने में कितना समय लगा. कंपनियों कहती है कि पर्सनलाइज्ड वैक्सीन और कीट्रुडा के कॉम्बो दोनों ही मामलों में सिर्फ कीट्रुडा की तुलना में बेहतर परिणाम दिए. बता दें कि साल 2022 में पूरे वर्ल्ड से 3.30 लाख से ज्यादा नए मेलेनोमा के मामले सामने आए. इसमें 1.12 सिर्फ अमेरिका से थे.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

डॉक्टर कनिका सूद शर्मा (डायरेक्टर रेडिएशन ओंकोलॉजी, धर्मशीला नारायण हॉस्पिटल) का कहना है कि मेलेनोमा एक बहुत ही एग्रेसिव स्किन कैंसर है. एक्सपर्ट कहती हैं कि ये कैंसर के वापस आने के जोखिम को 50 फीसदी तक कम करती है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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