IITs में स्टूडेंट सुसाइड क्यों होते हैं? सुप्रीम काेर्ट भी जता चुका है चिंता, सुधार पर क्या हुआ?

IIT दिल्ली के MSc फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या मामले में बवाल जारी है. पिछले तीन दिन से IIT दिल्ली के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. IIT दिल्ली की तरफ से मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया है. तो वहीं दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सिग्नेचर कैंपेन चलाने की घोषणा की है. प्रदर्शनकारी छात्रों ऋषिकेश कुमार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं. तो वहीं इसके साथ ही IIT कैंपस के माहौल ऐसा बनाने की मांग रहे हैं, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को सुसाइड के लिए मजबूर ना होना पड़ा है. अब सवाल ये है कि क्या IITs का माहौल छात्रों के लिए तनावपूर्ण है. आखिर क्या वजह है कि IITs में छात्र सुसाइड करते हैं.
आइए, इस कड़ी में IITs में स्टूडेंट्स के सामने आए मामलों के बारे में जानते हैं. जानते हैं कि आखिर क्या कारण है कि IITs में स्टूडेंट्स सुसाइड करते हैं. जानते हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की चिंता और समाधान के लिए उठाए गए कदम क्या हैं.
भारत में स्टूडेंट सुसाइड दर 7.6 फीसदी
IITs ही नहीं भारत में दूसरे अन्य संस्थानों में स्टूडेंट सुसाइड के मामले आते रहे हैं. पिछले साल मॉनसून सत्र के दौरान एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने स्टूडेंट सुसाइड के आंकड़े संसद के पटल पर रखे थे.जिसके तहत भारत में सुसाइड करने वाले प्रत्येक 100 में से 7वां छात्र होता है.
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या (एडीएसआई) रिपोर्ट के हवाले से स्टूडेंट सुसाइड के आंकड़ें साझा किए थे. उन्होंने बताया कि साल 2022 में कुल 13,044 स्टूडेंट सुसाइड के मामले सामने आए, जो कुल सुसाइड से होने वाली मौतों का 7.6 फीसदी था.
8 साल में IITs में 39 स्टूडेंट्स ने किया सुसाइड
देश के प्रतिष्ठित एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में IITs में स्टूडेंट्स सुसाइड के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं. असल में पिछले साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में स्टूडेंट्स के आंकड़े रखे थे. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 से 2025 तक देश के बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में 98 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया है, इसमें सबसे अधिक 39 स्टूडेंट सुसाइड के मामले IITs से सामने आ चुके हैं. इसके बाद NITs से 25, सेंट्रल यूनिवर्सिटी से 25 और IIMs से स्टूडेंट सुसाइड के 4 मामले में इस अवधि में दर्ज किए गए हैं.
SC जता चुका है चिंता, नेशनल टॉस्क फोर्स का कर चुका है गठन
एकेडमिक इंस्टीट्यूशन में स्टूडेंट सुसाइड पर सुप्रीम कोर्ट चिंता जता चुका है. कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया. तो वहीं सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट स्टूडेंट सुसाइड पर एक नेशनल टॉस्क फोर्स गठित कर चुका है, जिसे स्टूडेंट सुसाइड की वजह और सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी.
स्टूडेंट्स सुसाइड के क्या हैं कारण
IITs में एडमिशन लेने के बाद भी स्टूडेंट सुसाइड क्यों करते हैं? इस सवाल को लेकर पिछले कई वर्षों से बहस जारी है. इस संबंध में केंद्र सरकार कुछ वजह बता चुकी हैं तो वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित नेशनल टॉस्क फोर्स ने भी कुछ वजह बताई थी. आइए, जानते हैं कि आखिर स्टूडेंट्स सुसाइड के पीछे क्या कारण हैं.
IITs जैसे एकेडमिक इंस्टीट्यूट में स्टूडेंट्स सुसाइड के संभावित कारण को लेकर मार्च 2023 में लोकसभा में सवाल पूछा गया था, जिस पर केंद्र सरकार ने ये संभावित कारण बताए थे.
- एकेडमिक तनाव
- परिवार के बीच प्रदर्शन का दबाव
- स्टूडेंट्स के व्यक्तिगत कारण
- मेंटल हेल्थ से जुड़े मामले
सुप्रीम कोर्ट की टॉस्क फोर्स ने अपने सर्वें में स्टूडेंट्स सुसाइड के निम्न कारण पाए हैं. आइए, उनके बारे में जानते हैं.
- जाति व लिंग के आधार पर भेदभाव
- एकेडमिक दवाब
- रैगिंग
- आर्थिक बोझ
- मेंटल हेल्थ पर चर्चा से परहेज और उससे जुड़ी बदनामी
- दिव्यांगता
- राजनीतिक विचार
स्टूडेंट सुसाइड रोकने के लिए नेशनल टास्क फोर्स के सुझाव
स्टूडेंट सुसाइड की वजह का पता लगाने और इसके लिए प्रभावी रोकथाम उपाय के लिए नेशनल टास्क फोर्स ने कई राज्यों व संस्थानों का दौरा किया. इसके साथ ही ऑनलाइन सर्वे भी आयोजित किया. जिसमें 80 हजार स्टूडेंट्सस,10 हजार फैकेल्टी, 15 हजार पैरेंट्स और 700 से अधिक मेंटल काउंसलर्स से सुझाव एकत्रित किए, जिसके बाद टास्क फोर्स ने कुछ सुझाव प्रेषित किए.
- एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में श्रेणी और कोटा के अनुसार स्टूडेंट्स और फैकेल्ट स्ट्रक्चर
- इंस्टीट्यूट्स में मेंटल हेल्थ सर्विस उपलब्ध कराई जाएं.
- सुसाइड के मामलों को दर्ज किया जाए.
- शिकायत निवारण समितियां बनाए जाएं, जिसमें एंटी-रैगिंग, आंतरिक शिकायत, समान अवसर प्रकोष्ठ जैसी कमेटियां शामिल हैं.











