मुंबई में 10% पानी कटौती पर कांग्रेस का BMC पर हमला, 95.90% जलभंडारण के बावजूद टैंकर माफिया से मिलीभगत का आरोप

मुंबई में 10 प्रतिशत पानी कटौती को लेकर राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीएमसी प्रशासन को घेरा है। पार्टी ने पिछले वर्षों के जलाशयों में हुए जलभंडारण के आंकड़ों का हवाला देते हुए पानी कटौती के फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने बीएमसी प्रशासन पर कथित तौर पर टैंकर माफियाओं के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया है।
7 झीलों में 95.90% जलभंडारण
बीएमसी की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाली सात झीलों में 95.90 प्रतिशत जलभंडारण हो चुका है। कांग्रेस ने इसी आंकड़े को आधार बनाकर पानी कटौती के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद शहर में पानी की कटौती क्यों की जा रही है, इसका प्रशासन को जवाब देना चाहिए।
पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना
कांग्रेस ने पिछले दो वर्षों के जलभंडारण के आंकड़ों की भी तुलना की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में सात जलाशयों में 96.27 प्रतिशत पानी जमा था। वहीं 2024 में इसी अवधि के दौरान जलभंडारण की स्थिति 96.54 प्रतिशत थी। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा जलभंडारण पिछले वर्षों के आंकड़ों के काफी करीब है।
सोसाइटियों को टैंकर मंगाने पड़ रहे
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे ने आरोप लगाया कि मुंबई की कई सोसाइटियों में 10 प्रतिशत पानी की कटौती की जा रही है। इसके चलते लोगों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए निजी टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले जलाशयों में करीब 96 प्रतिशत जलभंडारण है, तो पानी की कटौती की जरूरत क्यों पड़ रही है।
टैंकर माफिया से मिलीभगत का आरोप
अतुल लोंढे ने आरोप लगाया कि पानी कटौती के कारण नागरिकों को टैंकर पर निर्भर होना पड़ रहा है और इससे टैंकर कारोबार को फायदा हो रहा है। कांग्रेस ने इसी आधार पर बीएमसी प्रशासन और कथित टैंकर माफिया के बीच मिलीभगत की जांच की मांग उठाई है।
पाइपलाइन नहीं पहुंचने वाले इलाकों पर भी सवाल
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में विकास कार्य नहीं हुए हैं या अभी तक पानी की पाइपलाइन नहीं पहुंची है, वहां टैंकर की जरूरत समझी जा सकती है। लेकिन जिन क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था मौजूद है, वहां जलभंडारण पर्याप्त होने के बावजूद कटौती और टैंकर निर्भरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।











