भंडारा में स्कूल खुलते ही बढ़ी साइकिलों की मांग, कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्कूल बैग, किताबों और यूनिफॉर्म के अलावा अब साइकिलों की खरीदारी भी काफी तेज हो गई है। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें, पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली की ओर रुझान के चलते साइकिल एक बार फिर विद्यार्थियों और अभिभावकों की पहली पसंद बनती जा रही है। विशेषकर नाबालिग बच्चों को समय से पहले बाइक या मोपेड (स्कूटर) देने के बजाय साइकिल देना अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

बदलते समय के साथ साइकिलों का स्वरूप भी बेहद आधुनिक और स्टाइलिश हो गया है। स्कूल और कोचिंग क्लास आने-जाने के लिए अब साइकिल एक जरूरी साधन बन गई है। सड़क दुर्घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी और नाबालिग वाहन चालकों पर पुलिस प्रशासन की सख्ती के कारण विद्यार्थी भी स्वेच्छा से साइकिल का उपयोग कर रहे हैं। आठवीं कक्षा से लेकर कॉलेज तक के छात्रों में इन दिनों स्पोर्ट्स लुक और गियर वाली साइकिलों का विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है।

इस वर्ष साइकिलों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में सामान्य साइकिल की कीमत करीब 7 हजार रुपये से शुरू होती है, जबकि गियर और प्रीमियम मॉडल्स की कीमत 12 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद भी इसकी बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

गियर व शॉक एब्जॉर्बर वाली साइकिलों की भारी मांग
भंडारा शहर के साइकिल विक्रेता नरेश नंदनवार ने कहा है कि “स्कूल शुरू होने के साथ ही दुकानों पर ग्राहकों की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की भीड़ और अधिक बढ़ने की संभावना है। गियर और शॉक एब्जॉर्बर (सस्पेंशन) वाली साइकिलें आज के विद्यार्थियों की पहली पसंद बनी हुई हैं। बाजार में रेंजर साइकिलें 5 हजार रुपये से लेकर 18 से 20 हजार रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा और साइकिल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

बच्चों के लिए सुरक्षित और किफायती विकल्प
साइकिल विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि साइकिल केवल फैशन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और स्वास्थ्यवर्धक परिवहन का सबसे उत्तम माध्यम है। इससे बच्चों में आत्मनिर्भरता बढ़ती है और उनका नियमित शारीरिक व्यायाम भी होता है। साथ ही, स्कूल बस या ऑटो-रिक्शा का मासिक खर्च भी बचता है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्टील, रबर, प्लास्टिक और पेंट जैसे कच्चे माल (रॉ मटेरियल) की कीमतों में वैश्विक बढ़ोतरी, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आई बाधाएं तथा परिवहन लागत बढ़ने के कारण साइकिल और उसके स्पेयर पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इसके चलते ही निर्माताओं को कीमतों में वृद्धि करनी पड़ी है।

छात्रों और अभिभावकों की राय
विद्यार्थी जय भांडारकर ने कहा है कि “मुझे स्पोर्ट्स लुक वाली गियर साइकिल बेहद पसंद है। यह चलाने में आसान (लाइटवेट) होने के साथ-साथ दिखने में भी बहुत आकर्षक लगती है। साइकिल की मदद से मुझे स्कूल और कोचिंग क्लास समय पर पहुंचने में काफी सुविधा होती है तथा अब ऑटो-रिक्शा या बस के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।”

अभिभावकों के लिए एक बेहतर निवेश

अभिभावक किशोर देशमुख ने कहा है कि “मेरा बच्चा अब आठवीं कक्षा में पहुंच गया है और स्कूल जाने के लिए साइकिल ही सबसे अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। हर महीने स्कूल बस या ऑटो का भारी खर्च वहन करना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में साइकिल बच्चों के स्वास्थ्य, समय की बचत और आर्थिक दृष्टि से एक बेहतर निवेश साबित होती है।”

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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