वासेपुर गैंगस्टर मामले में बड़ा खुलासा, मददगारों पर केस दर्ज; CCTV फुटेज मिटाने और शरण देने के आरोप

झारखंड के वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम और उसके सहयोगी को फरार होने में मदद करने वालों के खिलाफ अंबिकापुर कोतवाली थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। झारखंड पुलिस की जांच में सामने आया है कि स्थानीय बस संचालक बैदुल खान ने गैंगस्टर को शरण दी थी। बैदुल खान शब्बीर आलम का रिश्तेदार भी बताया जा रहा है। मामला दर्ज होने के बाद से वह फरार है।
जानकारी के अनुसार करीब 15 दिन पहले झारखंड पुलिस शब्बीर आलम को गिरफ्तार करने अंबिकापुर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान शब्बीर के बेटे और उसके कुछ साथी मौके पर पहुंच गए और पुलिस से बहस करने लगे। इसी दौरान शब्बीर आलम और उसका सहयोगी जावेद मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए।
झारखंड पुलिस ने आरोप लगाया है कि जिस इलाके से शब्बीर फरार हुआ, वहां उसके मददगारों ने प्रभाव का इस्तेमाल कर आसपास लगे 17 सीसीटीवी कैमरों का फुटेज हटवा दिया। पुलिस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जांच शुरू होने से पहले ही डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर मददगारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड का एक अन्य गैंगस्टर शाकिब अफजल पिछले करीब 13 वर्षों से अंबिकापुर में पहचान बदलकर रह रहा था। उसके खिलाफ धनबाद में हत्या, लूट और एके-47 जैसे घातक हथियारों से हमले सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। झारखंड में संपत्ति कुर्क होने के बाद उसने अंबिकापुर के लालमाटी इलाके में जंगल किनारे आलीशान मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया था।
पुलिस के अनुसार शाकिब अफजल होटल और जमीन के कारोबार से भी जुड़ा हुआ था। उसके बैदुल खान का रिश्तेदार होने की भी जानकारी सामने आई है। झारखंड पुलिस की कार्रवाई के बाद शाकिब भी फरार बताया जा रहा है। आरोप है कि बैदुल खान ने दोनों गैंगस्टरों को अंबिकापुर में शरण दी और उनके साथ मिलकर बस तथा एंबुलेंस का बड़ा कारोबार खड़ा किया।
झारखंड पुलिस शब्बीर आलम की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों और उनकी मदद करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं सरगुजा पुलिस ने भी कहा है कि मामले की जांच जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
इस बीच भाजपा नेता आलोक दुबे ने आरोप लगाया है कि शाकिब अफजल ने लालमाटी क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा समुदाय की जमीन पर कब्जा कर मकान बनाया था। उन्होंने इस पूरे मामले में संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।











