बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय हुआ मानसून, अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के मजबूत होने से प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अगले 48 घंटों के दौरान मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।
प्रदेश में 1 जून से अब तक सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दो से तीन दिनों में अच्छी बारिश होने से वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। बुधवार को सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में रिकॉर्ड किया गया।
राजधानी रायपुर में गुरुवार को दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी, जबकि कुछ इलाकों में भारी वर्षा के साथ बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है। मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़े मानसून को बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया से नई ऊर्जा मिलेगी। यदि यह सिस्टम और मजबूत होता है तो अगले 48 घंटों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों, जलाशयों और भूजल स्तर को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
जुलाई सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक बारिश वाला महीना माना जाता है, लेकिन इस बार मानसून के कमजोर पड़ने से प्रदेश में कई दिनों तक अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी। मौसम वैज्ञानिक इसे ब्रेक मानसून की स्थिति मान रहे हैं, जिसमें ट्रफ लाइन और निम्न दबाव के सिस्टम राज्य से दूर चले जाते हैं।
15 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 32 जिलों में से 16 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश का सामना कर रहे हैं। वहीं 14 जिलों में वर्षा सामान्य श्रेणी में रही है और केवल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सामान्य से 74 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। मुंगेली में भी सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ फसलों की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। जिन जिलों में अब तक कम बारिश हुई है, वहां धान सहित अन्य फसलों की बुआई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। यदि आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचेगी और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।











