बारिश की पहली परीक्षा में फेल हुईं इमारतें… क्या अब दिल्ली-एनसीआर की हर बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी है?

दिल्ली-एनसीआर में हर बारिश के दौरान मकानों के गिरने और हाई राइज सोसाइटियों के फ्लैटों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाए सामने आती हैं. इस बार की बारिश भी यही आफत लेकर आई है. सबसे दर्दनाक घटना दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 से सामने आई है. यहां एक निर्माणाधीन मकान बारिश के चलते भरभराकर जमींदोज हो गया. मकान के मलबे में दबकर 4 मजदूरों की मौत हो गई है.

गुरुग्राम के सेक्टर 37D में एक लग्ज़री अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में भी बारिश की वजह से बालकनी का एक हिस्सा गिर गया. फ़िलहाल किसी के घायल होने की खबर नहीं है, यह घटना इम्पीरिया एस्फ़ेरा फ़ेज़-2 कॉम्प्लेक्स के टॉवर E में हुई है. निवासियों ने बताया कि जब पहली मंज़िल की बालकनी का एक हिस्सा गिरा, तो उन्हें ज़ोरदार आवाज़ सुनाई दी.गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर-13 में लगातार हो रही बारिश के बीच गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया. यहां एक निर्माणाधीन 32 मंजिला बहुमंजिला इमारत के पास की मुख्य सड़क अचानक ताश के पत्तों की तरह धंस गई. इस दौरान 20 फीट गड्ढा बन गया. उस जगह मौजूद कार और स्कूटी गड्ढे में समा गईं. गनीमत यह थी कि बहुमंजिला इमारत का कोई हिस्सा नहीं धंसा, वरना भारी नुकसान हो सकता था.

दिल्ली एनसीआर में हर साल बारिश आते ही क्यों गिरने लगते हैं मकान?

  • दिल्ली-एनसीआर में कई मकान 30 से 50 साल पुराने हैं. यह लगातार 30 साल से बारिश झेलते रहे हैं. इस दौरान उनकी नींव के आसपास की मिट्टी ढीली पड़ जाती है. इससे इमारत का भार झेलने की क्षमता काफी ज्यादा घट जाती है.ऐसे में जब अधिक बारिश होती है. इस दौरान पानी लंबे समय तक इमारत की नींव के आसपास जमा रहता है, तो पहले से कमजोर हो चुकी मकान की ढांचे पर दबाव बढ़ता है. यही वजह है बारिश की मौसम के दौरान अक्सर 30 से 40 साल पुराने मकानों के ढहने की खबरें आती रहती है.
  • बिना स्वीकृत नक्शे, कमजोर निर्माण सामग्री और इंजीनियरिंग मानकों का पालन न होने से भवन बारिश का दबाव नहीं झेल पाते हैं. दिल्ली में ऐसे कई इलाके हैं, जहां बिना मानकों का पालन किए मकान बना दिए गए हैं. इसके सबसे ज्यादा केसेज हाई-राइज़ बिल्डिंग्स के फ्लैट्स में देखे जाते हैं. बिल्डर द्वारा घटिया निर्माण सामाग्री का उपयोग कर फ्लैट तैयार कराए जाते हैं, जिसकी वजह अक्सर बारिश के मौसम में इनकी बॉलकनियों के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आता है.
  • दिल्ली-एनसीआर ड्रेनेज की समस्या भी बड़ी विकट है. कई इलाके ऐसे हैं, जहां एक बारिश के बाद से ही घटिया ड्रेनेज सिस्टम के चलते दिनों और महीनों तक जलभराव की स्थिति रहती है. अगर यह जलभराव किसी मकान के सामने हैं, तो चुनौतियां और बड़ी हैं. इससे उस मकान के नींव के पास की मिट्टी कटती हैं. इससे वह मकान नींव से ही कमजोर होने लगता है, उसके ढहने की आशंका बढ़ जाती है.
  • कई इलाकों की जमीनें बहुमंजिला इमारतों के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं. फिर भी कम जानकारी होने या जानबुझकर अवहेलना करते हुए मल्टीस्टोरीज बिल्डिंग तैयार कर दी जाती है. ऐसे में इन मकानों का मूल ढांचा कमजोर रह जाता है. बारिश के मौसम में इनके ढहने की आशंका बढ़ जाती है. साल 2018 के जुलाई में ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी में इन्हीं वजहों से बहुमंजिला इमारत ढही थी.
  • मकानों के रखरखाव में लापरवाही, दीवारों की दरारें समय रहते ठीक नहीं कराने, सीलन और रिसाव वक्त पर ठीक न होने से इमारत की मजबूती लगातार कम होती रहती है. ऐसे में अधिक बारिश में ये मकान कमजोर होते चले जाते हैं और ढहने की स्थिति में पहुंच जाते हैं. इसके अलावा नियमित तौर पर स्ट्रक्चरल ऑडिट ना होने पर भी मकानों की स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती है. मकान की फिर से मरम्मत नहीं हो पाती है और बड़ा खतरा दस्तक दे देता है.

क्यों दिल्ली-एनसीआर की हर बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी है?

इसका साफ-साफ मतलब यह हुआ कि दिल्ली-एनसीआर में हर मानसून के दौरान मकानों के गिरने की घटनाएं केवल लगातार हो रही बारिश का नतीजा नहीं होतीं. इसके पीछे सालों से कमजोर होती इमारतें, ढीली पड़ती नींव, खराब जल निकासी, अवैध निर्माण और रखरखाव की कमी जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं. फिर जाकर ये कमजोर इमारतें बारिश नहीं झेल पाती हैं और ढह जाती हैं.

ऐसे में दिल्ली-एनसीआर की हर बिल्डिंग का स्ट्रक्चर ऑडिट जरूरी है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि यहां बने मकानों और बिल्डिंग्स की क्या स्थिति है. क्या वह इतनी मजबूत स्थिति में है कि अधिक बारिश झेल सके. अगर वह इस स्थिति में नहीं है तो समय उनकी मरम्मत कराया जा सके और रोहिणी सेक्टर-16 जैसी दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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