पाकिस्तान के खिलाफ है तो ताली बजाओ… जानें Dhurandhar पर ऐसा क्यों बोले कुमार विश्वास

फिल्मी पर्दे पर एक ओर ‘धुरंधर’ की धुआंधार बैटिंग जारी है, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे क्रिटिसाइज भी कर रहे हैं. जिस पर देश के जाने-माने कवि कुमार विश्वास का रिएक्शन आया है. उन्होंने कहा कि साढ़े तीन घंटे की एक फिल्म बनी है धुरंधर. फिल्म बनी है तो देखो या मत देखो. देखने वालों ने तो हल्ला नहीं मचाया लेकिन जिनको विरोध करना था उन्होंने कहा कि ये तो प्रोपेगेंडा है.

ऐसे लोग खतरा महसूस करने लगते हैं

इससे पहले फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने भी तंज कसा. उन्होंने कहा, जब भी धुरंधर जैसी कोई फिल्म आती है तो इंडस्ट्री से जुड़े लोग ऐसी फिल्मों को खुद के लिए खतरा महसूस करने लगते हैं. इतना ही नहीं ऐसे लोग फिल्म को नजरअंदाज करना पसंद करते हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जब भी धुरंधर जैसी कोई क्रांतिकारी फिल्म आती है तो इंडस्ट्री के लोग इस तरह की फिल्मों को खुद के लिए खतरा मानते हैं.

ये बात उन सो-कॉल्ड फिल्मों पर लागू होती है

इसके बाद राम गोपाल वर्मा ने हाल के सालों में देश में बनी फिल्मों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ऐसी फिल्मों की कहानियां हर वर्ग के दर्शकों को लुभाने की कोशिश में कमजोर पड़ जाती हैं. ये बात उन तमाम सो-कॉल्ड बड़ी फिल्मों पर और भी ज्यादा लागू होती है जो इस समय बनने की लाइन में हैं. इन सभी फिल्मों की स्टोरी और निर्माण धुरंधर से पहले बनी फिल्मों के मॉडल पर किया गया है.

धुरंधर सिर्फ एक जबरदस्त फिल्म ही नहीं…

उन्होंने कहा, सबसे चिंता की बात ये है कि धुरंधर सिर्फ एक जबरदस्त फिल्म ही नहीं है, बल्कि पिछले 50 साल में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली भी फिल्म बन गई है. सबसे बड़ी बात ये है कि ‘आदित्यधरफिल्म्स’ इडस्ट्री से जुड़े लोगों को अपनी फिल्मों की तुलना धुरंधर से करने के लिए मजबूर कर रही है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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