कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ी:17 करोड़ की पेट स्कैन मशीन 7 साल से बंद, क्योंकि 1.71 लाख में मरम्मत की फाइल अटकी

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अंबेडकर अस्पताल में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना कैंसर यूनिट में करीब साढ़े 500 मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां पेट स्कैन जांच नहीं हो पाने की वजह से उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, क्योंकि सात साल पहले छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने करीब 17 करोड़ रुपए खर्च कर यह मशीन खरीदी थी।
इसमें 11 करोड़ की पेट स्कैन और 6 करोड़ रुपए की गामा मशीन थी। लेकिन अफसरों की लापरवाही और विभागीय जटिलताओं की वजह से यह मशीन आज तक चालू नहीं हो पाई। अंबेडकर से रोज औसतन 30 से 40 मरीज पेट स्कैन जांच कराने निजी अस्पताल जाते हैं।
वहां एक बार की जांच का खर्च 25 से 30 हजार रुपए तक होता है। इस तरह सिर्फ अंबेडकर अस्पताल के मरीजों पर हर दिन लगभग 8-9 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब अस्पताल में वही जांच सरकारी स्तर पर मुफ्त में हो सकती है।
दो-तीन बार भेजा प्रस्ताव, हर बार नजरअंदाज
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कुछ साल पहले इस मशीन से जुड़ा मामला कोर्ट में भी चला। इसके बाद से टेक्नीशियन की भर्ती प्रक्रिया केवल प्रस्तावों में ही अटकी रह गई। मेडिकल कॉलेज और अंबेडकर अस्पताल के अधिकारियों ने दो-तीन बार प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा, लेकिन हर बार फाइल वित्त विभाग में जाकर ठंडे बस्ते में चली गई।
अब ताजा स्थिति यह है कि मशीन बनाने वाली कंपनी सिमंस ने इसे दोबारा चालू करने की सहमति दे दी है। मरम्मत और सर्विसिंग पर करीब 1.71 लाख रुपए का खर्च आएगा। काम शुरू करने के लिए फाइल शासन स्तर पर भेजी गई है, लेकिन वह अभी वहीं लंबित है।
सीजीएमएससी ने बिना प्रस्ताव भेजी थी मशीन पड़ताल में सामने आया कि पेट स्कैन चालू न होने के पीछे चिकित्सा शिक्षा विभाग से ज्यादा सीजीएमएससी के तत्कालीन अफसर जिम्मेदार हैं। उन्हें न तो चिकित्सा शिक्षा विभाग ने और न ही अंबेडकर अस्पताल प्रशासन की ओर से ये मशीन खरीदने का प्रस्ताव भेजा गया था।
मशीन की निर्माता कंपनी की ओर से केवल इस मशीन की जरूरत और फायदे का उल्लेख करते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर को जानकारी दी गई। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक को लिखकर मशीन की उपयोगिता के बारे में पूछा। तब अधीक्षक ने लिख दिया कि ये अच्छी है और मरीजों के लिए उपयोगी होगी। इसी आधार पर मंत्री ने सीजीएमएससी को आगे की कार्रवाई के लिए लिखकर भेज दिया। और मशीन खरीद ली गई।
क्या है पेट स्कैन और गामा मशीन पेट स्कैन रेडियोएक्टिव ट्रेसर से शरीर की कोशिकाओं की गतिविधि दिखाता है। इससे कैंसर की शुरुआती पहचान, बीमारी के फैलाव, और इलाज के असर का पता लगाया जाता है। यह खासतौर पर ब्रेन, लंग, लिवर, ब्रेस्ट और बोन कैंसर में उपयोगी है और सीटी-एमआरआई से अधिक सटीक मानी जाती है।
गामा कैमरा रेडियोन्यूक्लाइड तकनीक से हार्ट, थायराइड, किडनी, बोन और लिवर की कार्यप्रणाली दिखाता है। इससे अंगों की स्थिति और कार्यक्षमता दोनों का पता चलता है। यह हार्ट और किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों की जांच में अहम होता है। दोनों जांचें नॉन-इनवेसिव और सुरक्षित हैं। फर्क इतना है कि पेट स्कैन सेल स्तर पर बीमारी की गहराई बताता है, जबकि गामा कैमरा अंगों की कार्यक्षमता दिखाता है।
जल्द शुरू होंगी मशीनें जनता की सुविधाओं को देखते हुए पैट स्कैन मशीन जल्द शुरू कराई जाएगी। शासन स्तर पर इसकी तैयारी की जा रही है।











