OBC क्रीमी लेयर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने लगाई गुहार, 11 मार्च के आदेश में बदलाव की मांग, CJI का इनकार

ओबीसी क्रीमी लेयर मामले में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है। मोदी सरकार ने ओबीसी क्रीमी लेयर मामले में 11 मार्च को दिए आदेश में बदलाव की मांग की। वहीं सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सरकार का कहना है 11 मार्च के आदेश का OBC पर बुरा असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जरूरी दिशा-निर्देश भी मांगा है।
केंद्र सरकार ने 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से OBC क्रीमी लेयर मामले में 11 मार्च को दिए गए आदेश में स्पष्टीकरण के लिए समान बेंच के गठन का अनुरोध किया। हालांकि सीजेआई की बेंच ने इस मामले में कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमी लेयर तय करने के लिए सिर्फ माता-पिता की वेतन आय को एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पीएसयू, बैंक या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता के वेतन को आधार मानकर बच्चों को केवल इसलिए आरक्षण के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनकी सैलरी तय सीमा से अधिक है। मामले में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने माना था कि इस तरह का भेद करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
अब पूरे मामले पर मोदी सरकार का कहना है 11 मार्च के आदेश का OBC पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि अगर माता-पिता की सैलरी को आधार माना गया, तो ड्राइवर, चपरासी, क्लर्क आदि के बच्चे भी इस दायरे से बाहर हो जाएंगे और फिर EWS और OBC NCL के बीच कोई अंतर नहीं रह जाएगा।
केंद्र ने SC से मांगे जरूरी दिशा-निर्देश
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से 11 मार्च के फैसले को स्पष्ट करने और जरूरी दिशा-निर्देश मांगे हैं। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2016 के बाद सिविल सेवा परीक्षा (सीएससी) में चयनित करीब 100 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) उम्मीदवारों के दावों पर विचार करने का आदेश दिया था।











