सिर्फ तस्वीर के लिए लगाते हैं पौधे… मुंबई में पेड़ों की कटाई पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- ऐसा ना हो ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़े

बंबई हाई कोर्ट ने शहर के मैंग्रोव जंगलों के लगातार घटते क्षेत्र को लेकर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि अगर हरियाली इसी तरह कम होती रही तो जल्द ही वह दिन आ जाएगा, जब लोग सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर चलने लगेंगे. एक याचिका पर सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने यह टिप्पणी की.

अदालत महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी (MSETCL) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कंपनी ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए पालघर जिले में दहानू से अंबेसारी तक 132 केवी की बिजली लाइन बिछाने के लिए 847 मैंग्रोव के पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी. कोर्ट ने कहा कि मुख्य चिंता सिर्फ मैंग्रोव पेड़ों की कटाई नहीं है.

‘जो पौधे लगाते हो, वे कुछ समय बाद मरने लगते हैं’

असली समस्या यह है कि कटे पेड़ों के बदले जो नए पौधे लगाए जाते हैं, वे जीवित रहें. आप दोबारा पौधे तो लगाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं करते. जो पौधे लगाते हो, वे कुछ समय बाद मरने लगते हैं. आप बस तस्वीर खींचकर दिखा देते हो कि हमने पौधे लगा दिए. उसके बाद फिर मुड़कर भी नहीं देखते कि वे पौधे जिंदा हैं या मर गए.

ऐसा ना हो ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़े- HC

कोर्ट ने कहा कि जहां पहले से ही बहुत सारे पेड़ हैं, वहां नए पौधे लगाने का क्या फायदा? मुंबई में पहले से ही ऑक्सीजन की बहुत कमी है. अगर मैंग्रोव और हरी-भरी जगहें इसी तरह नष्ट होती रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब लोग सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर साथ लेकर घूमेंगे. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि वे दूसरे जगह पौधारोपण करने के बजाय, उसी इलाके में खराब हो चुकी वन भूमि को चिह्नित करेंगे और वहीं नए पौधे लगाएंगे.

उन्होंने कहा कि हम क्षतिग्रस्त वन भूमि की पहचान करेंगे, लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा. कंपनी ने बताया कि 13.06 किलोमीटर लंबी बिजली लाइन बिछाने के लिए कुल 3.35 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है, जिसमें 1.9656 हेक्टेयर मैंग्रोव जंगल भी शामिल है.

2018 में मुंबई HC ने पेड़ काटने पर लगाई थी रोक

बता दें कि साल 2018 में मुंबई हाई कोर्ट ने बिना अपनी अनुमति के मैंग्रोव पेड़ काटने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. उसके बाद से किसी भी प्रोजेक्ट में मैंग्रोव कटाई के लिए कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य हो गया है. अदालत ने इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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