रघु ठाकुर ने PMमोदी और राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- सत्ता से सवाल पूछना लोकतंत्र की पहचान

रघु ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा, बेरोजगारी और जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि वे जल्दबाजी में देश को गैरजरूरी सवालों में न उलझाएं।

जन आंदोलनों में संयमित भाषा जरूरी

ठाकुर ने कहा कि किसी भी जन आंदोलन की भाषा तार्किक और लोकतांत्रिक होनी चाहिए। प्रधानमंत्री या किसी अन्य व्यक्ति के लिए गाली-गलौज और अपशब्दों का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों में भी संघर्ष हुआ, लेकिन आंदोलन की भाषा में गाली-गलौज नहीं थी।

जन आंदोलन के बताए पांच आधार

उन्होंने कहा कि वास्तविक जन आंदोलन स्वतःस्फूर्त होना चाहिए और जनता के अपने संसाधनों से चलना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल तत्काल लाभ नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ का विरोध करते हुए कहा कि आंदोलन की शैली संयमित और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।

‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ शब्दों पर आपत्ति

ठाकुर ने मीडिया से अपील की कि ‘जेन-जी’ और ‘अल्फा’ जैसे शब्दों के बजाय स्कूल और कॉलेज के छात्रों जैसे सरल शब्दों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलनों में तर्क के साथ अपनी बात रखी जानी चाहिए और अपशब्दों से बचना चाहिए।

PM की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल

रघु ठाकुर ने कहा कि नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने लंबे समय से पत्रकारों के साथ नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना जरूरी है और सरकार को उन सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके मुताबिक यदि पत्रकारों के सवाल पूछने की स्वतंत्रता खत्म होती है तो लोकतांत्रिक संवाद कमजोर होता है।

सरकार और जनता के बीच संवाद पर जोर

उन्होंने कहा कि देश के हालात चिंताजनक हैं और जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सरकार और जनता के बीच संवाद बना रहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से भी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की अपील की।

महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के मुद्दे पर टिप्पणी

महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के साथ कथित मारपीट की घटनाओं पर ठाकुर ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में हिंदी बोलने वालों के साथ भेदभाव होगा तो राष्ट्रीय एकता का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। उन्होंने नई शिक्षा नीति के त्रिभाषा फॉर्मूले को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदी को भारतीय भाषा के रूप में उचित स्थान मिलना चाहिए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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