दलित-आदिवासी युवाओं के मामलों पर राहुल गांधी का केंद्र से हस्तक्षेप का आग्रह

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर 2018 में एससी/एसटी एक्ट को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान दलित और आदिवासी युवाओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन मामलों के चलते कई निर्दोष युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और उन्हें अब भी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अपने पत्र में राहुल गांधी ने उल्लेख किया कि 2 अप्रैल 2018 को देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन एक न्यायिक फैसले के खिलाफ थे, जिससे एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम कमजोर हुआ था। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य दलितों और आदिवासियों को भेदभाव और हिंसा से सुरक्षा देना है, और इसके खिलाफ आवाज उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई युवाओं को गिरफ्तार किया गया था और आज भी उनके खिलाफ मामले लंबित हैं। इनमें से कई युवा पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं, जिनकी शिक्षा, रोजगार और भविष्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि इन मामलों की संवेदनशील और न्यायपूर्ण तरीके से समीक्षा की जाए और जहां संभव हो, मामलों को वापस लिया जाए। उनका कहना है कि संसद द्वारा बाद में संशोधन कर कानून को फिर से मजबूत किया गया था, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाना चाहिए, ताकि प्रभावित युवाओं को न्याय मिल सके और उनके जीवन को नई दिशा मिल पाए।

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