शिबू सोरेन को मिला मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान, राष्ट्रपति ने रूपी सोरेन को सौंपा अवॉर्ड, समारोह में कल्पना रहीं मौजूद

 झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. शिबू सोरेन की तरफ ये यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने स्वीकार किया.

मंगलवार को संसद भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन को यह पुरस्कार प्रदान किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के अलावा गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन और अन्य परिजन भी उपस्थित रहे.

गुरुजी शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी समाज के उत्थान, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए दिया गया है. शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. उनके बचपन का नाम शिवलाल था. प्रारंभिक शिक्षा नेमरा और गोला हाई स्कूल में पूरी की. उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक थे और गांधीवादी विचारों के अनुयायी. 27 नवंबर 1957 को महाजनों ने उनकी हत्या कर दी. जमीन पर कब्जा और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से हुई इस घटना ने किशोर शिबू के जीवन को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई का रास्ता चुन लिया.

आदिवासी समाज को संगठित करने की मुहिम

युवावस्था में शिबू सोरेन ने आदिवासियों को एकजुट करना शुरू किया. उन्होंने संथाल नवयुवक संघ और सोनोत संथाल समाज का गठन किया. धनकटनी आंदोलन के जरिए उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. पारसनाथ की पहाड़ियों और टुंडी क्षेत्र को उन्होंने अपने संघर्ष का मुख्य केंद्र बनाया.

टुंडी में सामाजिक परिवर्तन की मिसाल

टुंडी और आसपास के क्षेत्रों में शिबू सोरेन ने सामूहिक खेती, पशुपालन और रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत की, जिससे ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली. उन्होंने स्थानीय विवादों के निपटारे के लिए एक समानांतर सामाजिक व्यवस्था भी विकसित की. इन प्रयासों से आदिवासी और मूलवासी समाज में उनकी लोकप्रियता बढ़ी और लोग उन्हें “दिशोम गुरु” कहकर पुकारने लगे.

झारखंड आंदोलन और झामुमो की स्थापना

1972 में शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की. विनोद बिहारी महतो अध्यक्ष बने तो शिबू सोरेन महासचिव. अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चला यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़े जन-आंदोलन में बदल गया. आपातकाल के दौरान 1975 में उन्हें जेल जाना पड़ा. 1977 में टुंडी से चुनाव लड़े लेकिन हार गए.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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