शिवसेना UBT को झटके पर झटका, सचिन अहीर के बाद एक और बड़े नेता ने दिखाया बगावती तेवर

महाराष्ट्र की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। 6 सांसदों की बगावत और फिर आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार सचिन अहीर के पाला बदलने के बाद, अब पार्टी के भीतर एक और बहुत बड़े विभाजन की विस्फोटक खबरें सामने आ रही हैं।

राजनीतिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारी के मुताबिक, सचिन अहीर के बाद अब विधान परिषद सदस्य सुनील शिंदे ने भी अपने बगावती तेवर कड़े कर लिए हैं। चर्चा है कि सुनील शिंदे अकेले नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व में ठाकरे गुट के करीब 11 विधायक और कई पूर्व पार्षद बहुत जल्द एक साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगवाई वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं।

एकनाथ शिंदे की बड़ी मोर्चाबंदी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाकरे खेमे को पूरी तरह से जमीनी स्तर पर अलग-थलग करने के लिए एक बेहद गुप्त और बड़ी मोर्चाबंदी की है। पहले चरण में जहां 6 लोकसभा सांसदों को तोड़कर महायुति ने अपनी ताकत दिखाई, वहीं दूसरे चरण के तहत विधान परिषद के मजबूत स्तंभ सचिन अहीर को अपने पाले में लाकर उन्हें सीधे उपसभापति पद का उम्मीदवार बना दिया।महायुति में यह पद शिंदे गुट के कोटे में खाली चल रहा था, जिस पर अहीर को बिठाकर उपमुख्यमंत्री ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वफादारी बदलने वालों को तत्काल बड़ा इनाम मिलेगा। इसी रणनीति के तहत अब अन्य विधायकों से भी संपर्क साधा जा रहा है।

आदित्य ठाकरे के निर्वाचन क्षेत्र वर्ली में पूरी तरह बदलेगा समीकरण
सचिन अहीर और सुनील शिंदे दोनों को ही मुंबई, खासकर वर्ली और कोलीवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना का सबसे मजबूत जमीनी आधार माना जाता रहा है। आदित्य ठाकरे को साल 2019 में वर्ली से सुरक्षित चुनाव जिताने में इन दोनों ही नेताओं की मुख्य भूमिका थी। ऐसे में अगर सचिन अहीर के बाद सुनील शिंदे भी अपने समर्थित विधायकों और पार्षदों के साथ आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के साथ चले जाते हैं, तो यह आदित्य ठाकरे के राजनीतिक करियर और वर्ली विधानसभा सीट पर उनके भविष्य के लिए सबसे बड़ा और आत्मघाती झटका साबित होगा।

ऑपरेशन लोटस नई स्क्रिप्ट, अलर्ट मोड पर मातोश्री
इस महा-विभाजन की खबरों के बाद ‘मातोश्री’ और ठाकरे खेमे के शीर्ष नेता पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। बचे हुए विधायकों को एकजुट रखने और उनसे संपर्क साधने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। हालांकि, शिंदे गुट के सूत्रों का दावा है कि 11 विधायकों के साथ दल-बदल की पूरी योजना और कागजी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आने वाले कुछ ही दिनों में एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में एक भव्य समारोह के दौरान इस बगावत को सार्वजनिक किया जा सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि लगातार गिरते विकेटों के बीच उद्धव ठाकरे अपनी बची हुई पार्टी को रजनीतिक पिच पर किस तरह संभाल पाते हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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