शहीद वाटिका में पत्थरों पर दर्ज है बलिदान की गाथा, 1,429 जवानों की यादों को पेड़-पौधों और डिजिटल डिस्प्ले ने संजोया

रायपुर के ऊर्जा पार्क स्थित शहीद वाटिका छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों की स्मृतियों को संजोए हुए है। वर्ष 2012 में तैयार की गई इस वाटिका में 1988 से छत्तीसगढ़ में शहीद हुए जवानों के नाम पत्थरों पर उकेरे गए हैं। वर्ष 2025 तक यहां 1,429 जवानों की शहादत का रिकॉर्ड दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
वाटिका में शहीदों की स्मृति में पेड़ भी लगाए गए हैं। हर पेड़ को उनके बलिदान की याद से जोड़ा गया है। हरियाली के बीच लगी शिलाओं पर दर्ज नाम उन जवानों की कुर्बानी की कहानी बताते हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में शांति और सुरक्षा के लिए जान गंवाई।
नक्सल हिंसा के दौर की बड़ी शहादतें
छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा के दौरान कई बड़े हमलों में सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक 2007 में करीब 200 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद 2010 में 177, 2009 में 126 और 2011 में 87 जवानों ने नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान जान गंवाई।
15 मार्च 2007 को रानीबोदली में सुरक्षा कैंप पर हुए हमले में 55 जवान शहीद हुए थे, जबकि 25 जवान घायल हुए थे। इसी तरह 2010 में चिंतलनार-ताड़मेटला क्षेत्र में हुए हमले में 76 जवानों की जान गई थी। इन घटनाओं को बस्तर में माओवादी हिंसा के सबसे गंभीर अध्यायों में गिना जाता है।
बुर्कापाल में सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में तैनात जवानों को भी नक्सलियों ने निशाना बनाया था। वहीं तर्रेम और जोनागुड़ा के जंगलों में हुई मुठभेड़ में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 30 से ज्यादा जवान घायल हुए थे। इन घटनाओं की स्मृतियां भी शहीद वाटिका में दर्ज हैं।
डिजिटल डिस्प्ले में दिखाई जाती है वीरता की कहानी
शहीद वाटिका में बने इंटरप्रिटेशन सेंटर में शहीद जवानों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की गई हैं। डिजिटल डिस्प्ले के जरिए उनके जीवन, सेवा, परिवार और वीरता से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाती है।
वाटिका की परिकल्पना 30 जनवरी 2012 को तत्कालीन राज्यपाल शेखर दत्त की पहल पर की गई थी। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले सेना, सशस्त्र बल और पुलिस के जवानों की स्मृतियों को सुरक्षित रखना था।
पत्थरों पर दर्ज नाम और उनके नाम पर लगाए गए पेड़ इस स्मारक को अलग पहचान देते हैं। शहीद वाटिका आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाती है कि प्रदेश में शांति और सुरक्षा की राह में अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।











