सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या है अंतर? जानिए पौराणिक रहस्य

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति का माहौल बन गया है. मंदिरों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं और भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-पाठ कर रहे हैं. सावन के सोमवार के साथ इस महीने में पड़ने वाली सावन शिवरात्रि का भी विशेष महत्व माना जाता है. साल 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी.अक्सर लोग सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों पर्वों में काफी अंतर है. दोनों ही भगवान शिव को समर्पित हैं, लेकिन इनके समय, धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यताएं अलग-अलग हैं. आइए जानते हैं सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है और इन दोनों पर्वों से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं क्या कहती हैं.

सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है. इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है. यानी साल में कुल 12 मासिक शिवरात्रियां होती हैं. इन सभी शिवरात्रियों में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है. वहीं सावन महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है. सावन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इस महीने की शिवरात्रि का भी भक्तों के बीच खास महत्व है. इस तरह आसान शब्दों में समझें तो महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की सबसे प्रमुख शिवरात्रि है, जबकि सावन शिवरात्रि श्रावण मास में आने वाली शिवरात्रि है. दोनों पर्वों पर भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक किया जाता है, लेकिन दोनों की पौराणिक मान्यताएं अलग हैं.

साल 2026 में कब है सावन शिवरात्रि?

साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू हो चुका है और 28 अगस्त, शुक्रवार तक रहेगा. इसी दौरान 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं.

महाशिवरात्रि क्यों है सबसे खास?

महाशिवरात्रि को भगवान शिव की सबसे बड़ी शिवरात्रि माना जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. महाशिवरात्रि से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यता भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की है. मान्यता है कि इसी पावन रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का पर्व भी कहा जाता है.

सावन शिवरात्रि का क्या है महत्व?

सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है. यही कारण है कि सावन के पूरे महीने में शिव भक्त पूजा, व्रत और जलाभिषेक करते हैं. सावन शिवरात्रि इसी पवित्र महीने में आती है, इसलिए इसका महत्व भी बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को जल चढ़ाने और बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं. कांवड़ यात्रा का भी सावन शिवरात्रि से खास संबंध है. कांवड़िए हरिद्वार और अन्य पवित्र गंगा घाटों से गंगाजल लेकर पैदल अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंचते हैं. इसके बाद सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

सावन शिवरात्रि और समुद्र मंथन की कथा

सावन महीने से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा समुद्र मंथन की भी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो उसकी वजह से पूरे संसार पर संकट आ गया. तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा. मान्यता है कि विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया. इसी कथा के कारण सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने और जलाभिषेक करने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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