महाराष्ट्र में 17 साल पुराने मामले से DyCM शिंदे और ठाकरे समेत 4 बरी, NCP नेता ने दर्ज कराया था मानहानि का केस

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं को मानहानि से जुड़े 17 साल पुराने एक केस से राहत मिल गई है. राज्य के कल्याण जिला और सत्र अदालत के जज संतोष आगे ने आज बुधवार को शिंदे, ठाकरे के अलावा पूर्व सांसद आनंद परांजपे और शिवसेना के पार्षद दिवंगत राजेंद्र देवलेकर को राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता (NCP) वसंत डावखरे की ओर से मानहानि के मामले में बरी कर दिया.

दिवंगत एनसीपी नेता वसंत डावखरे की ओर से साल 2009 के कल्याण में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कथित वीडियो और सीडी दिखाए जाने को लेकर यह केस दर्ज कराया गया था. कल्याण सीट पर चुनाव के दौरान शिवसेना की ओर से आनंद परांजपे तो एनसीपी के वसंत डावखरे मैदान में थे. शिवसेना प्रत्याशी को चुनाव में जीत हासिल हुई थी.

अदालत ने इस मामले में उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, पूर्व सांसद आनंद परांजपे और रमाकांत देवलेकर को अब निर्दोष करार दिया है. तब चुनाव प्रचार के दौरान शिवसेना से जुड़े नेताओं ने एक जनसभा के दौरान वसंत डावखरे को लेकर कुछ आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो क्लिप दिखाए थे.

जिस सभा में यह क्लिप चलाई गई वहां बैठक के आयोजक कल्याण से शिवसेना के तत्कालीन पार्षद शिंदे और देवलेकर थे. लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी सभा में कथित वीडियो दिखाए जाने से नाराज दिवंगत डावखरे ने यह केस दर्ज कर दिया. इसके बाद उद्धव ठाकरे के अलावा एकनाथ शिंदे, आनंद परांजपे और रमाकांत देवलेकर के खिलाफ केस शुरू हो गया और कई सालों तक यह मामला चला.

सुनवाई के दौरान 20 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज

मानहानि से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से 20 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इनमें पुलिस अधिकारियों और जांच अधिकारियों की गवाही भी शामिल थी. इसके बाद सभी आरोपियों की धारा 313 के तहत न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी की गई.

सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बयान दर्ज कराया गया. इसी साल अगस्त 2026 में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में अपने-अपने बयान दर्ज कराए. कोर्ट में सुनवाई के दौरान ठाकरे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था.

CD और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर बचाव पक्ष के सवाल

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कथित सीडी, उसमें की गई एडिटिंग, फॉरेंसिक रिपोर्ट और जांच प्रक्रिया को लेकर बड़े सवाल उठाए. बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों का कथित मामले से सीधे तौर पर संबंध साबित करने वाला ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है. यह मामला सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दायर किया गया था. मामले में गवाह झूठे थे. इसका मकसद चुनाव को लाभ पहुंचाना था.

करीब 17 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद कल्याण न्यायालय ने आज बुधवार को मामले में फैसला सुनाते हुए उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, आनंद परांजपे और रमाकांत देवलेकर को सभी आरोपों से निर्दोष मुक्त कर दिया.

इनपुट – सुनील

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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