रायबरेली में सरकारी लापरवाही की इमारत! 51 साल पुरानी कॉलोनी मौत का इंतज़ार कर रही

रायबरेली: शहर में 51 वर्ष पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाये गए राजकीय कालोनी के सरकारी आवासों की हालत बद से बदतर होती जा रही है.मरम्मत व देखरेख के अभाव में आवासों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां रहने वाले अधिकारी व कर्मचारी और उनके परिवार हर वक्त डर के साये में जीवन गुजारने को मजबूर हैं.
बरसात और तेज हवा के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं.स्थिति यह है कि छत से पानी टपकता है , दीवारों में गहरी दरारें और आवास की छतों पर झाड़ी उग आई है.इसके अलावा जगह-जगह से झड़ता प्लास्टर किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है.
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षो पहले बनाए गए इन आवासों की न तो समय पर मरम्मत कराई गई और न ही पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम ही उठाया गया है ।कई आवासों की छतें कमजोर हो चुकी हैं, बिजली की जर्जर वायरिंग और टूटे दरवाजे – खिड़कियां खतरे को और बढ़ा रही हैं.
छोटे – छोटे बच्चे और बुजुर्ग परिवारीजन हमेशा आशंकित रहते हैं कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए.स्थिति यह है कि मौसम बिगड़ते ही कर्मचारियों के परिवारों की चिंता बढ़ जाती है.बारिश के दौरान पानी भरने से कमरों में सीलन और गंदगी फैल जाती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है.
बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आवासों की बदहाली दूर करने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई जा रही है.Bजिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों के रहने के लिए 1974 में राजकीय कालोनी का निर्माण कराया गया था। राजकीय कालोनी में कुल 540 आवास बनाए गए थे.
पांच दशक पहले बनाए गए यह आवास जर्जर हो गए हैं.जर्जर हो चुके आवासों को तोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने चिन्हित कर रखा है.इसके बावजूद अधिकारी व कर्मचारी इन जर्जर आवासों को आवंटित कराकर उसमें निवास कर रहे हैं.इन आवासों की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि कब कौन सा हिस्सा भवन का गिर पड़े कोई नहीं जानता है.











