छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, st आरक्षण पर cseb वितरण कंपनी से मांगा हलफनामा

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरक्षण नियमों के पालन को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए नियुक्ति और पदोन्नति में लागू आरक्षण प्रतिशत को लेकर हलफनामा दाखिल करे.
कोर्ट का सवाल: हाईकोर्ट ने कहा कि CSPDCL यह स्पष्ट करे कि ST वर्ग के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए. यह प्रतिशत किस आधार पर तय किया गया. जब न तो कोई ठोस आंकड़ा (डेटा) है और न ही राज्य सरकार का स्पष्ट आदेश, तो रोस्टर में बदलाव कैसे किया गया. अदालत ने इस मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर माना है.
क्या है पूरा मामला?: यह याचिका कनिष्ठ अभियंता प्रशांत विल्सन पन्ना, शीतल समीर टोप्पो सहित अन्य ने दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता नेल्सन पन्ना और आशुतोष मिश्रा ने पक्ष रखा. याचिका में 22 अगस्त 2024 को जारी उस विज्ञापन को चुनौती दी गई है, जिसमें सहायक अभियंता (प्रशिक्षु – प्रशिक्षण एवं विकास) पद पर पदोन्नति के लिए आवेदन बुलाए गए थे.
विज्ञापन के अनुसार पदों का विवरण था
अनारक्षित (UR): 17 पद
अनुसूचित जनजाति (ST): 16 पद
अनुसूचित जाति (SC): 0
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 0
याचिकाकर्ताओं ने विभागीय परीक्षा पास की और 30 जुलाई 2025 को इंटरव्यू भी दिया. लेकिन बाद में बिना कोई शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी किए, 29 नवंबर 2012 की राज्य शासन अधिसूचना का हवाला देकर आरक्षण रोस्टर बदल दिया गया.
संशोधित रोस्टर के अनुसार पद इस प्रकार कर दिए गए
अनारक्षित: 17 से 25
अनुसूचित जनजाति (ST): 16 से 9
अनुसूचित जाति (SC): 0 से 2
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 0 से 1
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव आरक्षण नियमों का सीधा उल्लंघन है. अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को होगी. अदालत ने CSPDCL को आदेश दिया है कि वह अगली सुनवाई में विस्तृत हलफनामा दाखिल कर सभी बिंदुओं पर जवाब दे.









