पाली-तानाखार विधायक की विधानसभा में हुंकार.. कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी को बड़ी प्रोत्साहन राशि देने की रखी मांग

कोरबा: विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने अपने पत्र में लिखा है कि, “छत्तीसगढ़ राज्य अनेक खेल विधाओं (कबड्डी, खो-खो, मैराथन, तीरंदाजी सहित अन्य) कि बहुत ही प्रतिभावान खिलाड़ियों का धनी है, ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने भारत देश ही नहीं, अपितु विदेशों में भी छत्तीसगढ़ के नाम को विभिन्न क्षेत्रों में गौरवान्वित किया है, जो कि हम सब के लिए हर्ष का विषय है.

साथ ही महिला कबड्डी विश्व कप 2025 में छत्तीसगढ़ कोरबा जिले के ग्राम केराकछार निवासी अंतरराष्ट्रीय महिला कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी ने अपनी अत्यंत गरीबी परिस्थिति के बावजूद हमारे भारत देश कि ओर से पूरे टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए विश्व कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी होने का स्थान प्राप्त किया और देश को विश्व विजेता बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई. जिससे छत्तीसगढ़ ही नहीं, अपितु पूरे देश को गौरवान्वित हुआ है.”

“शासन के खिलाफ गहरी नाराजगी”

उन्होंने आगे उल्लेख किया कि, “छत्तीसगढ़ राज्य में विगत नौ वर्षों से राज्य के अनेकों क्षेत्रों में राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों की घोषणा एवम् प्रोत्साहन सहित गरिमानुरूप शासकीय नौकरी नहीं दी गयी है, जिससे छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों एवम् खेल प्रेमियों में शासन-प्रशासन के प्रति रोष और आक्रोश व्याप्त है.”

ji

लेमरू हाथी अभ्यारण का भी उठाया मामला

संजू देवी राजपूत से जुड़े विषय के अलावा विधायक मरकाम ने हाथी अभ्यारण का भी मुद्दा सदन में रखा है. इस संबंध में उन्होंने लिखा है, “प्रदेश के जिला कोरबा के विकासखंड पोंडी उपरोड़ा/पाली/करतला/कोरबा हाथी प्रभावित क्षेत्र है. जहां हर वर्ष सैकडों मानववध के साथ ही फसल नुकसान होता है. यहां के निवासियों के लिए हाथी मानव संघर्ष एक बडी समस्या बन गई है.

शासन द्वारा इस संबंध में किसी प्रकार की पहल नही करने से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा हाथी अभ्यारण के नाम पर लेमरू हाथी रिजर्व अभ्यारण का प्रस्ताव 2005 में विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था और 2007 में इसे केन्द्र की मंजूरी मिलने के बाद भी आज दिनांक तक प्रारंभ नही किया गया है.”

उन्होंने आगे कहा है, “इस कोरबा जिला वनांचल क्षेत्र होने के कारण यंहा निवासरत् आदिवासी अपनी आजीविका के लिए जंगलों पर आश्रित हैं. इस लिहाज से जंगली हाथियों को उपयुक्त प्राकृतिक रहवास उपलब्ध कराना बेहद जरूरी हो गया है. कोरबा जिले के हाथी प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को नुकसान की भरपाई हेतु बहुत ही कम मुआवजा राशि दिया जाता है.

पूर्व मे सरकार द्वारा इस संबंध में यह आश्वासन दिया गया था कि इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है, लेकिन धरातल पर आज दिनांक तक किसी प्रकार की कार्यवाही नही की गई है. जिसके कारण प्रभावित क्षेत्र के निवासियों की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है. जिले के प्रभावित क्षेत्र के निवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति अविश्वास एवं आक्रोश व्याप्त है.”

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com