धमतरी में पहली बार 273 एकड़ में हो रही मूंगफली की फसल, किसानों को प्रोत्साहित करने सरकार दे रही…

धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धान की लगातार खेती के कारण भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है. नहरें सिंचाई का मुख्य स्रोत बनी हुई हैं, लेकिन करीब 30 हजार हैंडपंपों का उपयोग भूमिगत जल से सिंचाई के लिए किया जा रहा है. इससे जल संकट की समस्या गंभीर हो रही है. इस चुनौती से निपटने और भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाने के उद्देश्य से अब जिले के किसान फसल चक्र परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
धमतरी जिले में 273 एकड़ में पहली बार मूंगफली की खेती हो रही है. यह पहल जिले में गिरते भूजल स्तर और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से फसल चक्र परिवर्तन के तहत की जा रही है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा द्वारा किए जा रहे प्रयासों के चलते, जिले के 40 गांवों में किसानों ने आगामी रबी सीजन में धान की जगह दलहन-तिलहन की फसलें उगाने का निर्णय लिया है. जिले में ऐसा पहली बार है, जब 356 किसानों ने मिलकर 273 एकड़ में मूंगफली की खेती शुरू की है.
5 हजार हेक्टेयर में लगी तिलहनी फसल
जिलेभर में 1 लाख 58 हजार 180 किसान हैं. पिछले वर्ष दलहन फसलों का रकबा 21 हजार 850 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है. वहीं, तिलहनी फसलों का क्षेत्र 2 हजार 670 हेक्टेयर से बढ़ाकर 5 हजार हेक्टेयर किया है. जल संरक्षण, कृषि लागत में कमी और अधिक आय के अवसरों को ध्यान में रखते हुए संकरा, भोयना, संबलपुर, खपरी, पुरी, कन्हारपुरी, डांडेसरा, भुसरेंगा, बगौद, कोसमर्रा, कुर्रा, देवरी, बुड़ेनी और सिहाद जैसे गांवों के किसान फसल चक्र परिवर्तन को अपनाकर खेती को ज्यादा स्थायी और लाभप्रद बना रहे हैं. सरसों की फसल अब 4 हजार 500 हेक्टेयर में बोई जा चुकी है, जबकि चने की खेती 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में शुरू हो चुकी है.
किसानों की आय बढ़ाने पहल
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि धमतरी में पहली बार 273 रकबे में मूंगफली की खेती हो रही है. किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं. दलहन-तिलहन फसल लेने से किसानों की सिंचाई लागत में कमी आएगी. जल संसाधनों पर दबाव भी घटा है. मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर अगली फसलों के लिए भूमि को अधिक उपजाऊ बनाती हैं. किसानों की आय बढ़ने के साथ जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और कृषि को जलवायु-अनुकूल बनेगा.
.चना– खपरी, पुरी, सांकरा, तरसींवा, आमदी, रांवा, गुजरा, खुसरेंगा, कोर्रा, कातलबोड़, उमरदा, कुहकुहा, मोहंदी, छिपली, शुक्लाभाठा, छुही, सलोनी, संबलपुर, सामतरा व टेंगना में प्रत्येक क्लस्टर में चना फसल का रकबा 150 से 450 हेक्टेयर रकबा का है.
.मक्का– मुरूमसिल्ली, भोथापारा, रतावा, उमरगांव, गट्टासिल्ली को क्लस्टर में चयन किया, जिसमें प्रत्येक क्लस्टर में 50 से 200 एकड़ रकबा शामिल हैं. सेमरा, सिलघट, जुगदेही गांव के किसानों ने विशेष रूचि लिए हैं.
.सूरजमुखी– 10 एकड़ रकबे में लगाई जा चुकी है. कुसुम और सरसों के लिए उड़ेना का चयन हुआ है. सिलतरा के 25 एकड़ में यह फसल लगाई गई है. धमतरी ब्लॉक- लोहरसी, खरतुली, मोखा, बिजनापुरी, जंवरगांव, परेवाडीह, धौंराभाठा, रावणगुड़ा, खपरी, श्यामतराई, डोमा, तरसींवा, गुजरा, बोड़रा-सा, भोथीडीह, भानपुरी, रांवा. कुरूद ब्लॉक- सौराबांधा, जुगदेही, भरदा, गाड़ाडीह-आर, कन्हारपुरी, गोजी, देवरी, कुहकुहा, सिहाद, लोहारपथरा. मगरलोड ब्लॉक- पाहंदा, मोहंदी, बेलरदोना, मारागांव, बोईरगांव, सोनझरी, केकराखोली, बुड़ेनी, पेंड्रा, भरदा. नगरी ब्लॉक- टेंगना, सामतरा, बिलभदर.









