हर दिन 350 स्टूडेंट्स सुसाइड कर रहे, साल में 9 IIT के बच्चे भी जान दे रहे; आखिर कारण क्या है?

आज के दौर में पढ़ाई और करियर को लेकर मुकाबला लगातार बढ़ रहा है. बच्चों और युवाओं पर अच्छे नंबर लाने, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने और बेहतर करियर बनाने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है. इसके साथ परिवार की उम्मीदें, रिश्तों की परेशानी, आर्थिक दिक्कत और अकेलापन जैसी समस्याएं भी कई लोगों की जिंदगी को प्रभावित करती हैं.

ऐसे में आत्महत्या से जुड़े आंकड़े सिर्फ एक संख्या नहीं हैं, बल्कि समाज के सामने मौजूद कई तरह की परेशानियों की तस्वीर दिखाते हैं. हाल ही में हुआ IIT बॉम्बे के स्टूडेंट्स के सुसाइड का मामला तुल पकड़ रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से कहा है कि अगर सुसाइड का मामला आता है तो उसे पुलिस के पास दर्ज कराएं.

लाखों मामले केवल स्टूडेंट्स के

संसद में 8 जुलाई को सरकार ने बताया कि 2022 में स्टूडेंस्ट सुसाइड के 1 लाख 35 हजार मामले आए. यानी रोजाना 350 के करीब. वहीं IIT के स्टूडेंट्स का मामला देखा जाए, तो वो साल 2021 के बाद से बढ़ता नजर आया है. देश के प्रतिष्ठित IIT संस्थानों में पढ़ाई और करियर की कड़ी कॉम्पटिशन के बीच छात्रों के सुसाइड के आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं.

IIT के छात्रों का क्या है आंकड़ा

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में IIT में कम से कम 160 छात्रों की आत्महत्या दर्ज की गई, जिनमें 69 मामले सिर्फ पिछले पांच साल के हैं. 2021 के बाद IITs में 65 छात्र आत्महत्या कर चुके थे. वहीं 2024 में करीब 38% IIT ग्रेजुएट्स प्लेस नहीं हो पाए. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2021 के बीच IIT, IIM और केंद्रीय संस्थानों में आत्महत्या करने वाले 122 छात्रों में 68 यानी करीब 55% SC, ST और OBC वर्ग से थे.

नाबालिक बच्चों के आंकड़े

आंकड़ों से निकलती बड़ी तस्वीर

  • 2022 में देश में 1,70,924 आत्महत्याएं दर्ज हुईं
  • 18 से 45 साल की उम्र में 66.4 फीसदी मामले रहे
  • 18 साल से कम उम्र में 10,205 मामले दर्ज हुए
  • दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े 45,194 मामले सामने आए
  • 64.3 फीसदी मृतकों की सालाना आय 1 लाख रुपये से कम थी

बच्चों के आत्महत्या के मामले

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में देश में कुल 1,70,924 आत्महत्याएं दर्ज हुई थीं. इनमें 18 से 45 साल की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी करीब 66.4 फीसदी थी. वहीं 18 साल से कम उम्र के बच्चों के भी 10,205 मामले दर्ज हुए. इनमें हैरान करने वाले आंकड़े बच्चों के हैं.

5 क्लास से नीचे के 24707 बच्चे ने अपना जीवन सुसाइड के जरिए खत्म कर लिया. सुसाइड करने वाले 30,810 बच्चे ऐसे थे, जो 5-8 क्लास में पढ़ रहे थे. सुसाइड करने वाले 40894 बच्चे मैट्रिक में पढ़ रहे थे. 8854 बच्चे ऐसे थे, जो ग्रेजुएशन में पढ़ रहे थे. केंद्र का कहना है कि 2025 में 34 लाख बच्चों का टेली काउंसिल किया गया.

मेंटल हेल्थ निकली बड़ी वजह

मेंटल हेल्थ का मामला सबसे अहम है. इसलिए बच्चे सुसाइड कर रहे हैं. इन आंकड़ों को केवल उम्र के आधार पर देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. जब इन्हें पेशे, शिक्षा, आय और आत्महत्या से जुड़े दर्ज कारणों के साथ देखा जाता है तो कई दूसरी बातें सामने आती हैं. 2022 में सबसे ज्यादा मामले 18 से 30 साल की उम्र के लोगों में दर्ज हुए. इस आयु वर्ग में 59,108 मामले यानी 34.6 फीसदी थे.

इसके बाद 30 से 45 साल की उम्र में 54,351 मामले यानी 31.8 फीसदी दर्ज हुए. दोनों आयु वर्ग को मिलाकर 18 से 45 साल की उम्र के लोगों के 1,13,459 मामले सामने आए. बच्चों की बात करें तो 18 साल से कम उम्र में 10,205 मामले दर्ज हुए. इनमें 5,588 लड़कियां, 4,616 लड़के और एक ट्रांसजेंडर शामिल था. यानी बच्चों और युवाओं से जुड़े आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं.

छात्रों के आंकड़े क्या बताते हैं?

2022 में कुल 13,044 छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामले दर्ज हुए. इनमें महाराष्ट्र में 1,764, तमिलनाडु में 1,416, मध्य प्रदेश में 1,340 और उत्तर प्रदेश में 1,060 मामले दर्ज हुए. इस आंकड़े में 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं. पेशा देखें तो 2022 में दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े 45,194 मामले दर्ज हुए. यह कुल मामलों का 26.4% था. इसके बाद गृहिणियों से जुड़े 25,309 मामले यानी 14.8% थे. सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों की हिस्सेदारी 11.4%, बेरोजगारों की 9.2% और छात्रों की 7.6% रही.

पढ़ाई के आंकड़े क्या बताते हैं?

शिक्षा के स्तर पर 2022 के आंकड़े एक अहम तस्वीर दिखाते हैं. कुल 1,70,924 मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 10वीं पास लोगों की थी.

  • 10वीं पास: 23.9% यानी 40,894 मामले
  • 8वीं तक पढ़े: 18% यानी 30,810 मामले
  • 12वीं तक पढ़े: 15.9% यानी 27,191 मामले
  • 5वीं तक पढ़े: 14.5% यानी 24,707 मामले
  • बिल्कुल अनपढ़: 11.5% यानी 19,583 मामले
  • ग्रेजुएट और उससे ऊपर: 5.2% यानी 8,854 मामले
  • डिप्लोमा/ITI: 1.6% यानी 2,738 मामले
  • MBA जैसे प्रोफेशनल कोर्स: 0.4% यानी 700 मामले
  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों में 2022 में कुल 10,205 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए.
  • इनमें 5,588 लड़कियां, 4,616 लड़के और 1 ट्रांसजेंडर शामिल था. कारणों की बात करें तो सबसे ज्यादा मामले पारिवारिक समस्याओं से जुड़े थे.

बच्चों में प्रमुख कारणों का डेटा:

  • पारिवारिक समस्या: 2,556 मामले
  • प्रेम संबंध: 1,578 मामले
  • बीमारी: 1,292 मामले
  • परीक्षा में फेल होना: 1,123 मामले
  • शादी से जुड़े मुद्दे: 206 मामले
  • अन्य कारण: 1,627 मामले
  • कारण पता नहीं: 1,228 मामले

सुसाइड की वजह क्या थी?

छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए सरकार के क्या कदम?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) पुलिस में दर्ज मामलों के आधार पर आत्महत्या का डेटा जुटाता है. इसकी Accidental Deaths & Suicides in India (ADSI) रिपोर्ट में छात्रों की आत्महत्या के कारणों में पारिवारिक समस्या, प्रेम संबंध, बीमारी और परीक्षा में असफलता शामिल हैं. रिपोर्ट में साल, राज्य, उम्र और लिंग के आधार पर आंकड़े दिए जाते हैं. सरकार ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए कई कदम उठाए हैं.

  1. मनोदर्पण: छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मानसिक और भावनात्मक मदद देने के लिए हेल्पलाइन, लाइव सेशन और वेबिनार चलाए जाते हैं.
  2. अप्रैल 2023: UGC ने संस्थानों को छात्रों में तनाव, शैक्षणिक और करियर दबाव, अवसाद और व्यवहार संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए.
  3. जुलाई 2023: उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश जारी हुए, जिनमें काउंसलिंग, संकट की पहचान और आत्महत्या रोकथाम SOP पर जोर दिया गया.
  4. जनवरी 2024: कोचिंग संस्थानों के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए, जिनमें काउंसलिंग और छात्रों पर शैक्षणिक दबाव कम करने के उपाय शामिल हैं.
  5. 2024 से: 4,000 से ज्यादा शिक्षकों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रशिक्षण, सम्मेलन और कार्यशालाओं में हिस्सा लिया.
    IIT, IIM, NIT और IIIT: इन संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य या काउंसलिंग सेंटर बनाए गए हैं.
  6. कौशल और रोजगार: SWAYAM Plus पर 500 से ज्यादा कोर्स हैं और अब तक 6 लाख से ज्यादा छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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