CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, ममता बोलीं- जल्द होगी INDIA गठबंधन की बैठक

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर इस समय सियासी पारा चढ़ा हुआ है. कई विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की है, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक शामिल हैं. ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन होगा और इसको लेकर जल्द ही INDIA गठबंधन के नेता बैठक करेंगे. ममता ने कहा कि आज पूरा देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर आक्रोश में है और मेरी पहली मांग है कि उन्हें गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए.

ममता बनर्जी ने आगे कहा, ‘मेरी पार्टी ने ही सबसे पहले ये मुद्दे उठाए थे और चुनाव से 7-8 महीने पहले ही हम कह रहे थे कि हमें हराने के लिए जबरन हमारे वोट देने के अधिकार को छीना जा रहा है. बंगाल में शुरुआत में 58 लाख मतदाता प्रभावित हुए थे और सीमा खन्ना का नाम बार-बार सामने आया. मैंने कहा था कि वह बीजेपी के आईटी अधिकारी की तरह काम कर रही थीं. AI सिस्टम के जरिए शुरुआत में 58 लाख लोगों के नाम सील कर दिए गए, जिसके बाद 27 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए. हमने लगभग 32 लाख आपत्तियां दर्ज कराईं, जबकि बीजेपी ने एक ही बार में बोरियों में भरकर आपत्तियां जमा कर दीं, जो इस तरह से नहीं किया जा सकता’.

ममता ने बीजेपी पर वोटों में हेरफेर का लगाया आरोप

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा 7 लाख और नाम हटा दिए गए. अगर 27 लाख में 7 लाख जोड़ें तो कुल 34 लाख होते हैं और जब 34 लाख को 58 लाख में जोड़ा जाता है तो कुल 92 लाख होते हैं. अकेले बंगाल में 92 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया. इसके बाद EVM को हाईजैक कर लिया गया. हमारे पास इसकी जानकारी है. अलीपुर में साउथ 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में पहली, दूसरी या तीसरी मंजिल पर आग नहीं लगी थी, लेकिन अचानक उस जगह आग लग गई जहां EVM मशीनें रखी हुई थीं. ये वो EVM थीं, जो उन जगहों से जुड़ी थीं, जहां बीजेपी ने वोटों में हेरफेर करके जबरन जीत हासिल की थी’.

‘हम आजादी पसंद करने वाले लोग’

ममता ने बुधवार को अपने वर्चुअल संबोधन में कहा, ‘हम आजादी पसंद करने वाले लोग हैं, लेकिन आजादी के बाद भी हमें बिना आजादी वाले लोगों की तरह जीने पर मजबूर किया जा रहा है. अत्याचार जारी हैं, लगभग 14,000 मामले दर्ज किए गए हैं, उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर हमले हुए हैं और पिछले कुछ दिनों में लोगों ने देखा है कि पूरे बंगाल में क्या हो रहा है’.

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ सरकार और चुनाव आयोग के उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इन कामों में साथ दिया, जिनमें संबंधित डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर, आईटी अधिकारी, ERO और अन्य शामिल हैं. जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.

ममता बनर्जी के संबोधन की अन्य खास बातें

  • पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाना चाहिए. जिन राज्यों में EVM पर कब्जा करने या उसे हाईजैक करने और वोटरों को उनके अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकने के बाद चुनाव हुए थे, वहां पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर नए सिरे से चुनाव होने चाहिए. हम बहुत मज़बूत हैं और अब ज्ञानेश कुमार का सच सामने आ गया है.
  • विरोध करने की वजह से हमारा चुनाव चिह्न छीन लिया गया. जब हमारी पार्टी के प्रतिनिधि अधिकारियों से मिलने गए, तो उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया. मैं पूछती हूं, यह कैसी बदतमीज़ी है? क्या आपको लोगों का सम्मान करना नहीं आता? क्या आप सिर्फ BJP के लिए जिम्मेदार हैं? आपको देश, लोकतंत्र और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, न कि किसी एक पार्टी के राजनीतिक हितों के प्रति.
  • महाराष्ट्र में भी ऐसे ही संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें NCP और उद्धव ठाकरे की पार्टी भी शामिल है. अगर कोई व्यक्ति इतने अहम संवैधानिक पद पर रहते हुए ऐसा बर्ताव करता है, तो वह कुर्सी उस व्यक्ति के लिए सही नहीं है. चुनावों में जो कुछ भी हुआ, उसके लिए आप ज़िम्मेदार हैं। कुछ खास लोगों की वजह से लाखों लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है.
  • हमारी बोलने की आजादी, वोट देने की आजादी, वोट देने का अधिकार, काम करने का अधिकार और जीने का अधिकार प्रभावित हो रहा है. BJP बहुत ज्यादा ज्यादतियां कर रही है और लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है. मैं अच्छे पुलिस अधिकारियों का सम्मान करती हूं, चाहे वो केंद्रीय बल के हों या राज्य बल के, लेकिन किसी भी पुलिस अधिकारी को वर्दी पहनकर राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह काम नहीं करना चाहिए.
  • पुलिस अधिकारियों को याद रखना चाहिए कि सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन उन्हें अपने परिवारों के साथ ही रहना है. पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल BJP का झंडा उठाने के लिए नहीं किया जा सकता. महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं और कुछ मामलों में, जब वो न्याय के लिए पुलिस स्टेशन जाती हैं, तो उन्हीं के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए जाते हैं. न्याय के लिए गुहार लगाई जा रही है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही.
  • बंगाल में चार महीनों के भीतर 65 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और लगभग 14,000 मामले दर्ज किए गए हैं. उम्मीदवारों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर हमले हुए हैं. प्रभावित लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है. कई लोगों ने आत्महत्या भी की है. किसी न किसी को तो इसकी जिम्मेदारी लेनी ही होगी.
  • प्रेस, मीडिया और न्यायपालिका की बहुत अहम जिम्मेदारी है. मैं आप सभी से अपील करती हूं कि यह सुनिश्चित करें कि लोगों को न्याय मिले. अगर सब चुप रहें और सिर्फ प्रमोशन और अपने फायदे के बारे में सोचें, तो लोगों की बात कौन करेगा?
  • बंगाल ने आजादी के आंदोलनों और पुनर्जागरण को जन्म दिया. मैंने कहा था कि बंगाल की मिट्टी से एक तूफान उठेगा और वह तूफान उठ चुका है. हम जुल्म सहकर जिंदा नहीं रहते, लेकिन लोगों को यह याद रखना चाहिए कि उनसे उनका सम्मान और अधिकार छीने जा रहे हैं और आजादी के बाद भी हमें गुलामी की ओर धकेला जा रहा है.
  • यह अस्तित्व की लड़ाई है, आजादी की लड़ाई है, स्वतंत्रता सेनानियों की भावना वाली लड़ाई है, भारत माता के लिए लड़ाई है, वंदे मातरम के लिए लड़ाई है और जय हिंद के लिए लड़ाई है. बंगाल में हम ‘जय बांग्ला’ कहते हैं.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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