ग्रहण से पहले सूतक क्यों लगता है? जानिए धार्मिक मान्यता और जरूरी नियम

हिंदू धर्म और शास्त्रों में सूर्य ग्रहण से पहले के समय को ‘सूतक काल’ कहा जाता है. इसे एक तरह से अशुद्धि और नकारात्मकता का समय माना गया है. 17 फरवरी 2026 को लगने वाले साल के पहले सूर्य ग्रहण से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया है. शास्त्रों की मानें तो जब सूर्यदेव पर राहु का प्रभाव बढ़ता है, तो पूरे संसार में नकारात्मक ऊर्जा का संचालन होने लगता है. सूतक काल का मुख्य उद्देश्य हमें इस नकारात्मकता से बचाना और आत्मिक शुद्धि देना है. इस दौरान संयम और सावधानी रखने से जीवन में आने वाले संकटों के टलने की सुखद संभावना बनी रहती है.
सूतक काल में क्या करना आपके लिए अच्छा है?
सूतक काल के दौरान शारीरिक भागदौड़ के बजाय मन को शांत रखकर ईश्वर का ध्यान करना सबसे अच्छा होता है. इस समय अपने इष्ट देव के मंत्रों का मन ही मन जाप करना चाहिए, जिससे आपके घर और मन में सकारात्मकता बनी रहे. सूतक शुरू होने से पहले ही दूध, दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें. तुलसी में नकारात्मक ऊर्जा को रोकने की अद्भुत शक्ति होती है, जिससे भोजन के शुद्ध रहने की संभावना बनी रहती है. इस काल में धार्मिक पुस्तकें पढ़ना और शांत रहकर आत्म-चिंतन करना आपके मानसिक शक्ति को बढ़ाने में बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है.
सूतक काल में किन बातों से बचना चाहिए?
सूतक काल को पवित्र नहीं माना जाता, इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है. शास्त्रों के अनुसार, सूतक लगने के बाद भगवान की मूर्तियों को छूना और उनकी पूजा करना वर्जित है. इस समय नया भोजन पकाने और उसे खाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि सूर्य की शक्ति कम होने से हमारे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है. इसके अलावा, सूतक के समय सोने, नाखून काटने या कैंची-चाकू जैसी नुकीली चीजों का उपयोग करने से बचना चाहिए. विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने और घर के अंदर ही रहने की प्यार भरी सलाह दी जाती है.
सूतक के बाद घर की शुद्धि और दान का महत्व
जैसे ही ग्रहण खत्म होता है, सूतक काल का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है. इसके तुरंत बाद शुद्धिकरण करना बहुत जरूरी है. सबसे पहले नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और फिर पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें. रसोई की अच्छे से सफाई करें और ताजा भोजन बनाएं, क्योंकि सूतक के दौरान बना खाना अशुद्ध माना जाता है. ग्रहण के बाद किसी जरूरतमंद को अनाज या वस्त्रों का दान करना बहुत ही पुण्य का काम है. ऐसा करने से सूर्य देव के आशीर्वाद प्राप्त होता है और बिगड़े काम बनने लगते हैं











