छत्तीसगढ: प्रतापपुर में गंदगी या ‘गुप्त खेल’? बस स्टैंड सड़ांध में डूबा…

सूरजपुर: नगर पंचायत प्रतापपुर इन दिनों दोहरे संकट में घिरा नजर आ रहा है, एक तरफ शहर गंदगी और बदहाल सफाई व्यवस्था से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। शहर का प्रमुख बस स्टैंड, जिसे नगर का चेहरा माना जाता है, आज सड़ांध और लापरवाही का केंद्र बन चुका है। खुले नालों में सड़ता कचरा, बदबू और मच्छरों का प्रकोप लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई है। कई जगह नालियां खुली पड़ी हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि राहगीरों और दुकानदारों को सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है.
इसी बीच पार्षद मासूम ईराकी द्वारा जनदर्शन में की गई शिकायत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर पंचायत में पदस्थ सफाई दरोगा प्रमोद चक्रधारी से उनके मूल कार्य के बजाय लेखापाल का काम कराया जा रहा है। बताया गया है कि वे चेक जारी करने जैसे वित्तीय कार्य संभाल रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। इससे साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है.
दूसरे आवेदन में पिछले पांच वर्षों में ट्रैक्टर और टिपर के लिए खरीदे गए डीजल की जांच, प्लेसमेंट कर्मचारियों और फर्मों के भुगतान की जांच की मांग की गई है. आरोप है कि बिना पारदर्शिता के भुगतान किए गए हैं, जिससे गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई है.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक शौचालयों और नालियों की स्थिति बेहद खराब है और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे.
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था की आड़ में कोई बड़ा खेल चल रहा है, या यह सिर्फ लापरवाही का नतीजा है? जनदर्शन में शिकायत के बाद मामला गरमा गया है—अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के परिणाम पर टिकी है.









