36 दिन की जंग में अमेरिका को भारी नुकसान, ईरान के हमलों से सैनिकों, विमानों और ठिकानों पर बड़ा असर

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के 36 दिनों में अमेरिका को कई मोर्चों पर गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है। युद्ध के दौरान ईरान ने सैन्य ठिकानों, विमानों और सैनिकों को निशाना बनाते हुए लगातार पलटवार किया, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
इस अवधि में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, जबकि 300 से अधिक सैनिक घायल बताए जा रहे हैं। कुवैत, सऊदी अरब और इराक में हुए हमलों में कई जानें गईं, वहीं एक सैन्य विमान हादसे में भी अमेरिकी क्रू मेंबर्स की मौत हुई।
मध्य पूर्व में स्थित अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में कम से कम 13 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ। कुछ ठिकानों पर रडार सिस्टम और ऑपरेशन सेंटर पूरी तरह तबाह हो गए।
विमानों और ड्रोन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 16 सैन्य विमान नष्ट हुए हैं। इसमें लड़ाकू विमान और निगरानी विमान शामिल हैं। इसके अलावा कई आधुनिक ड्रोन भी हमलों में खत्म हो गए।
आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका को भारी झटका लगा है। शुरुआती दिनों में ही अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण नष्ट हुए, जबकि कुल नुकसान का आंकड़ा कई बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
इस युद्ध में होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना। इसके कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य और आर्थिक रणनीति पर बड़ा असर डाला है, वहीं क्षेत्रीय अस्थिरता भी लगातार बढ़ती जा रही है।









