Education News- प्राचार्यों पर हुई कार्यवाई से भड़का शालेय शिक्षक संघ, जिला प्रशासन की कार्यवाही को बताया तुगलकी फरमान
10 वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छा परिणाम न लाने का आरोप लगाकर बालोद जिला प्रशासन द्वारा 8 प्राचार्यो को निलंबित और 14 प्राचार्यो की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है, ऐसा दृश्य और कार्यवाही प्रदेश के अन्य जिलों से भी आने की आशंका है। जिससे प्रदेश में काफी बवाल मचा हुआ है।

Education News/बिलासपुर। शालेय शिक्षक संघ का कहना है, 8 प्राचार्य को निलंबित और 14 प्राचार्यों का वार्षिक वृद्धि रोककर जिला प्रशासन कर रहा मनमानी।प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है, छग के सभी जिलों में प्रथम आने की मची होड़, शिक्षकों की कक्षा और विद्यार्थी की क्षमतानुरूप अध्यापन कराने की नही दी स्वतंत्रता और पिछड़ने पर ठीकरा शिक्षकों के माथे फोड़कर एकपक्षीय कार्यवाही से शिक्षकों में आक्रोश है।सालभर युक्तियुक्तकरण से शिक्षको में अफरा तफरी,गैर शैक्षणिक कार्य, केंद्रीयकृत त्रैमासिक,अर्धवार्षिक,प्री बोर्ड परीक्षा, और प्रश्नबैंक के अनुरूप तैयारी कराने का शिक्षको पर दबाव पर अपेक्षानुरूप परिणाम न आने पर शिक्षकों को ही बनाया जा रहा बलि का बकरा।
10 वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छा परिणाम न लाने का आरोप लगाकर बालोद जिला प्रशासन द्वारा 8 प्राचार्यो को निलंबित और 14 प्राचार्यो की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है, ऐसा दृश्य और कार्यवाही प्रदेश के अन्य जिलों से भी आने की आशंका है। जिससे प्रदेश में काफी बवाल मचा हुआ है।
शालेय शिक्षक संघ छग ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए जिला प्रशासन द्वारा अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर शिक्षकों का मनोबल तोड़ने वाले कार्यवाही बताया। जिन प्राचार्यो पर एकतरफा कार्यवाही की गई उनमें से कुछ स्कूलों के बोर्ड परिणाम किसी मे 60% से किसी मे 80% से भी ऊपर आये हैं मगर फिर भी उन कक्षाओं में पिछले साल से कम परिणाम आने की दलील देकर उन स्कूल के प्राचार्यो पर कार्यवाही की गई है। जबकि इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिला प्रशासन और जिलाशिक्षाधिकारियो ने स्वयं ही साल भर तैयारियों की कमान खुद सम्भाल रखी थी।मासिक टेस्ट,त्रैमासिक,अर्धवार्षिक,व प्री बोर्ड के प्रश्नपत्र भी जिला द्वारा भेजा गया, यहाँ तक कि प्रश्नबैंक भी जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों को दिया गया और उसके अनुरूप तैयारी करने के निर्देश दिए गए। लगातार परीक्षा,के बीच मे ही टेक्नोफेस्ट,विज्ञान प्रदर्शनी,जम्बूरी,इंस्पायर ,सर्वे, प्रशिक्षण जैसे बड़े आयोजन भी किये गए इन आयोजनों में बड़े पैमाने पर शिक्षको को संलग्न किया गया,जिससे अध्यापन कार्य प्रभावित हुआ।
शालेय शिक्षक संघ छग के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने ऐसी कार्यवाही को शिक्षकों का मनोबल तोड़ने वाला बताया और कहा कि प्रदेश के शिक्षकों को युक्तियुक्तकरण , बीच सत्र में किये जा रहे स्थानांतरण , गैर शैक्षणिक कार्य और अपने स्कूल के अनुरूप अध्यापन व तैयारी कराने की स्वतंत्रता न देना ,शिक्षकों को हतोत्साह करता है। बालोद जिला प्रशासन द्वारा अव्यवहारिक निर्णय लिया गया है। 8 प्राचार्य का निलंबन और 14 प्राचार्य की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जिला प्रशासन द्वारा दिया गया है जबकि यह अधिकार केवल डीपीआई को है। अधिकारक्षेत्र से बाहर एकतरफा कार्यवाही से प्रदेश के शिक्षकों में रोष व्याप्त है। अधिकारीगण जब स्कूलों के अच्छे परिणाम आते है तो खुद उसका क्रेडिट लेने आगे आ जाते हैं, और किसी कारणवश परिणाम उनके अनुरूप नही रहता तो उसमें बलि का बकरा शिक्षकों को बना देते हैं।
Education News/प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने कहा, प्रदेश सभी स्कूल एक साथ नम्बर 1 नही हो सकते। कोई न कोई आगे पीछे होगा , पर ऐसी कार्यवाहियों से लगता है कि हर जिला के अधिकारियों में होड़ मची है कि वह नम्बर 1 हो, इसलिए साल भर वो अपने अनुसार सारी तैयारी और परीक्षाओं का आयोजन किया पर परिणाम उनके अनुरूप न आने पर अपनी भड़ास शिक्षकों पर उतार रहे हैं।
प्रदेश मीडिया प्रभारी व बालोद के जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने कहा कि वर्तमान में शिक्षकों का मनोबल तोड़ने के लिए नित नए षड्यंत्र किये जा रहे हैं एक ओर 20 वर्ष से भी अधिक अनुभवी प्राचार्यो को बीईओ/डीईओ जैसे पद पर जाने के रास्ते बंद कर उन्हें हतोत्साहित कर रही है वही 5 से 10 साल का अनुभव रखने वाले abeo के लिए इन पदों को सुरक्षित रखकर उन्हें उपकृत कर रही है। बीच सत्र में युक्तियुक्तकरण स्कूलों के अध्यापन व्यवस्था को चरमरा दिया गया। कमीशन खोरी के चक्कर मे मासिक,त्रैमासिक अर्धवार्षिक व प्री बोर्ड की परीक्षा के प्रश्नपत्र भी जिले से दिया जा रहा, ऐसे प्रश्नबैंक बनाये गए और उसी से तैयारी के निर्देश दिए पर वार्षिक परीक्षा के प्रश्न उससे इतर आये।
कोई भी परिणाम प्रॉपर योजना, अध्यापन, शिक्षक, पालक व बच्चे की IQ लेबल के सामूहिक प्रयास से आती है ऐसे में केवल शिक्षक को दोषी मानना गलत है और संगठन ऐसी कार्यवाही का विरोध करते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी चंद्रशेखर तिवारी,सुनील सिंह,विष्णु शर्मा,डॉ सांत्वना ठाकुर,सत्येंद्र सिंह,विवेक शर्मा,गजराज सिंह,राजेश शर्मा,शैलेश सिंह,प्रह्लाद जैन,सन्तोष मिश्रा,सन्तोष शुक्ला,शिवेंद्र चंद्रवंशी,दीपक वेंताल,यादवेंद्र दुबे,सर्वजीत पाठक,मंटू खैरवार,पवन दुबे,नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल,विनय सिंह,आशुतोष सिंह,भानु डहरिया,रवि मिश्रा,बिजेंद्रनाथ यादव,जितेंद्र गजेंद्र,अजय वर्मा,कृष्णराज पांडेय,घनश्याम पटेल,बुध्दहेश्वर शर्मा,प्रदीप पांडेय,उपेंद्र सिंह,पवन साहू,मनोज पवार,देवव्रत शर्मा, कैलाश रामटेके,अब्दुल आसिफ खान,सरवर हुसैन,कुलदीप सिंह चौहान,नेमीचंद भास्कर,राजेश यादव,अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत,सुशील शर्मा,विजय जाटवर, शशि कठोलिया,विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख,तिलक सेन,द्वारिका भारद्वाज, आदि पदाधिकारियो ने सरकार से उपरोक्त मांगो पर जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।











