शाला प्रवेशोत्सव यानी बच्चों के भविष्य संवारने का मिशन, गांधीनगर में शिक्षकों को नए निर्देश जारी

गांधीनगर में “शाला प्रवेशोत्सव-2026” और “कन्या केलवानी महोत्सव-2026” आयोजन किया गया, जिसका मकसद राज्य में शिक्षा के समग्र विकास को सुनिश्चित करना और प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 पर आधारित ‘राज्य पाठ्यक्रम ढांचा (एससीएफ)’ और विद्यालय गुणवत्ता मूल्यांकन एवं आश्वासन ढांचा (एससीएएएफ) पुस्तक का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया.

इन पुस्तकों का उद्देश्य विद्यालयों की गुणवत्ता का आकलन और सुधार करना है. मुख्यमंत्री ने ‘निपुण गुजरात कार्यक्रम’ का भी उद्घाटन किया, जो 2026-27 से 2028-29 की अवधि के दौरान राज्य भर में प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख तीन वर्षीय पहल है. मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के शाला प्रवेशोत्सव को प्रगति के उत्सव में बदलने और स्कूलों में बच्चों का 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, जिससे गुजरात शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को बनाए रख सके.

इस दौरान भूपेंद्र पटेल ने कहा कि 2003 में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद़ी ने इस अभियान की नींव रखी तब राज्य कई तरह की सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा था. उसमें शिक्षा का क्षेत्र भी था. 2001-02 में विद्यालय छोड़ने वाले की दर 37 फीसदी थी. ऐसे समय में हमारे मोद़ी ज़ी ने शाला प्रवेशोत्सव का विचार रखा. उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल सरकार का विषय नहीं बल्कि समाज का भी संकल्प बनना चाहिए. आज उसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री से लेकर विधायक, IAS, IPS और IFS अधिकारी तक बने हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि स्कूलों में 100 प्रतिशत बच्चों के नामांकन को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य के निरंतर प्रयासों का परिणाम है.

अपेक्षित शिक्षण परिणाम आवश्यक

उन्होंने बताया कि मोद़ी ज़ी नमो लक्ष्म़ी योजना शुरू की जिसके तहत कक्षा 9 से 12 की बेटियों को 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है. विज्ञान साधना योजना भ़ी लागू की गई है. जिसके तहत कक्षा 11 और 12 में विज्ञान संकाय के छात्रों को 25,000 रुपये तक की सहयोग राशि दी जाती है.

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि शाला प्रवेशोत्सव को सफल बनाने के साथ-साथ, छात्रों के पढ़ने, लिखने और गणित कौशल को मजबूत करके गुणोत्सव के प्रभावी कार्यान्वयन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि 100 प्रतिशत छात्र अपेक्षित शिक्षण परिणामों के साथ उत्तीर्ण हों.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार गुजरात ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है, उसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य को अग्रणी बनाने के लिए सभी के सामूहिक प्रयास और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. उन्होंने इस प्रकार की सहयोगात्मक भागीदारी को इस शैक्षिक सेवा मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक बताया.

गुजरात ने 5+3+3+4 शैक्षणिक संरचना भी लागू की

सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गुजरात ने 5+3+3+4 शैक्षणिक संरचना भी लागू कर दी है. और बालवाटिका का सार्वभौमिक क्रियान्वयन भी हो रहा है. वहीं, आधुनिक तकनीक ने भी इस यात्रा में एक शक्तिशाली भूमिका निभाई है. डिजिटल रूप से उपलब्ध जन्म पंजीकरण प्रणाली और चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के एकीकरण से प्रत्येक बच्चे तक पहुंच और उसकी सतत निगरानी सुनिश्चित हो रही है.

इसके साथ ही, गुजरात का विद्या समीक्षा केंद्र, जो भारत की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित शैक्षणिक निगरानी व्यवस्था है, पूरी शिक्षा प्रणाली की रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है. इसी व्यवस्था के अंतर्गत AI आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम संभावित ड्रॉपआउट होने वाले बच्चों की पूर्व- पहचान कर समय रहते आवश्यक मार्गदर्शन को भी सुनिश्चित कर रहा है. इस तरह से, राज्य सरकार के ये प्रयास दर्शाते हैं कि हमने शाला प्रवेशोत्सव की मूल भावना को आधुनिक युग में एक नई प्रासंगिकता दी है.

विद्यालयों को लगभग 326 करोड़ रुपये का योगदान

उन्होंने बताया कि पिछले 23 वर्षों में जनता और विभिन्न संस्थाओं द्वारा विद्यालयों को लगभग 326 करोड़ रुपये का योगदान प्राप्त हुआ है. इसी तरह, विद्यालय प्रबंधन समितियों में 75 प्रतिशत अभिभावकों की भागीदारी और 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व ने शिक्षा को वास्तव में एक सामुदायिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. इतना ही नहीं, गुजरात सरकार की मुख्यमंत्री ज्ञान साधना और ज्ञान सेतु मेरिट स्कॉलरशिप जैसी योजनाएं आज उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं जो प्रतिभा तो रखते हैं किंतु संसाधनों की कमी से सपनों को विराम देने पर विवश हो सकते थे.

शिक्षक सामुदायिक दृष्टिकोण अपनाएं

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे तीन दिवसीय शाला प्रवेशोत्सव को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में न देखें, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ इसमें भाग लें. उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों को अभिभावकों के सहयोग से सामुदायिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि बच्चों को विद्यालयों में स्वच्छता बनाए रखने, भोजन से पहले हाथ धोने और कम उम्र से ही सकारात्मक दैनिक आदतें विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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