गुजरात कोर्ट का बड़ा फैसला, वन अधिकारियों पर हमले में AAP विधायक चैतर वसवा को 7 साल की जेल

गुजरात के राजपीपला सेशन कोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और सात अन्य को सात साल की जेल की सजा सुनाई. यह सजा नवंबर 2023 के एक मामले में वन अधिकारियों पर हमला करने और जबरन वसूली के आरोप में सुनाई गई है. पीटीआई न्यूज के अनुसार सरकारी वकील वंदना भट्ट ने बताया कि एडिशनल सेशन जज ए वी हिरपारा ने उन सभी पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. आरोपियों में विधायक की पत्नी शकुंतला वसावा समेत चार महिलाएं शामिल हैं.
यह घटना 30 अक्टूबर, 2023 को हुई थी. वन विभाग के अधिकारियों ने गैर-कानूनी तरीके से कब्जे वाली सरकारी जमीन पर उगाई गई कपास की फसल हटा दी, जिससे विवाद हो गया. इसके बाद अधिकारियों को इस मुद्दे पर बात करने के लिए नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में वसावा के घर बुलाया गया.
अपने घर पर, डेडियापाड़ा (ST) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आदिवासी नेता वसावा ने अधिकारियों को धमकाया. उनमें से एक को थप्पड़ मारा और पिस्तौल से हवा में गोली चलाई. पुलिस ने बताया कि वसावा की पत्नी समेत आरोपियों ने फसल हटाने के लिए वन अधिकारियों से कुल 60,000 रुपये वसूले और बाद में वसावा ने पिस्टल छिपाकर या फेंककर सबूत मिटा दिए. वसावा के पर्सनल असिस्टेंट जितेंद्र वसावा पर विधायक से फोन पर संपर्क करने और उन्हें रंगदारी के पैसे लेने के लिए बुलाने का आरोप था.
विधायक, उनकी पत्नी और सात अन्य के खिलाफ इंडियन पुलिस कोड (IPC) की दंगा, रंगदारी और सरकारी अधिकारियों पर हमले से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था. 7 अगस्त, 2025 को चार्ज फ्रेम किए गए थे.
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित नायर ने कहा, “ट्रायल के दौरान कुल 17 सरकारी गवाहों से पूछताछ की गई, साथ ही कई डॉक्यूमेंट्री सबूत भी पेश किए गए, और सभी गवाहों ने हमारे केस को सपोर्ट किया. हमने ज्यादा से ज्यादा 10 साल की सजा मांगी.
सरकारी अधिकारियों पर हमला पड़ा भारी
यह तर्क देते हुए कि एक चुने हुए जन प्रतिनि्धि से उम्मीद की जाती है कि वह हिंसा का सहारा लेने के बजाय कानूनी उपाय अपनाएगा, और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है.” सुनवाई के दौरान, नायर ने तर्क दिया कि गवाहों के बयान, डॉक्यूमेंट्री सबूत, कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट से आरोपी की संलिप्तता साबित हुई.
उन्होंने हाल की दूसरी FIR रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिनमें वसावा का नाम हमला और सार्वजनिक रूप से अव्यवस्था फैलाने जैसे अपराधों के लिए था और कहा कि वे भी इसी तरह के व्यवहार का पैटर्न दिखाते हैं. बहस के आखिरी में वसावा के वकीलों ने सरकारी वकील के कुछ गवाहों को वापस बुलाने की मांग की, लेकिन सेशन कोर्ट ने इस अर्जी को खारिज कर दिया. इस फैसले के खिलाफ अपील को गुजरात हाई कोर्ट ने 7 मई, 2026 को और सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को खारिज कर दिया.
वन अधिकारियों से मारपीट और वसूली केस में सजा
इसके बाद आरोपी ने बचाव पक्ष के गवाहों से पूछताछ करने की इजाजत मांगने के लिए एक अर्जी दी, जबकि उसने पहले ऐसा नहीं करने का फैसला किया था. इस अर्जी को भी सेशन कोर्ट और बाद में हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया.
आप विधायक को 5 जुलाई, 2025 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सेक्शन 109 के तहत हत्या की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने कथित तौर पर एक मीटिंग के दौरान तालुका पंचायत अध्यक्ष पर हमला किया था. पिछले सितंबर में उन्हें जमानत देते हुए, हाई कोर्ट ने एक शर्त रखी थी कि वह एक साल तक डेडियापाड़ा तालुका में नहीं आएंगे.
अप्रैल 2026 में, भरूच जिले के झगड़िया GIDC पुलिस स्टेशन में वसावा और कुछ दूसरे लोकल नेताओं के खिलाफ तीन FIR दर्ज की गईं, जब उन्होंने एक फैक्ट्री में आग लगने के पीड़ितों के लिए मुआवजा मांगने गए एक व्यक्ति को थप्पड़ मारा और बदले में एक व्यक्ति ने उन्हें भी थप्पड़ मारा.










