US मिलिट्री बेस पर लगेंगे खनिज प्रोसेसिंग प्लांट, सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी

अमेरिका अपनी डिफेंस और इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए अब मिलिट्री बेस के भीतर ही महत्वपूर्ण खनिजों के प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रहा है. इस पहल के तहत रेयर अर्थ मिनरल्स, लिथियम, ग्रेफाइट और बोरॉन जैसे स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की प्रोसेसिंग अमेरिकी मिलिट्री बेस पर होगी. इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना, डिफेंस प्रोडक्शन को सुरक्षित बनाना और भविष्य की जियोपॉलिटिकल चुनौतियों से निपटने के लिए घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना है.

अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई को नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा मानते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. पेंटागन ने कई कंपनियों के साथ समझौते किए हैं, जिनके तहत अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ही मिनरल प्रोसेसिंग फैसिलिटीज विकसित की जाएंगी. यह पहली बार होगा जब अमेरिका मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मिनरल प्रोसेसिंग के लिए करेगा.

किन कंपनियों को मिली जिम्मेदारी

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, REalloys Inc., Titan Mining Corp., Ioneer Ltd. और Energy Exploration Technologies (EnergyX) इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं. इनमें ऑस्ट्रेलिया की Ioneer एकमात्र गैर-अमेरिकी कंपनी है. सरकार इन प्रोजेक्ट्स के लिए लोन और निवेश सहायता भी उपलब्ध करा रही है. REalloys यूटा स्थित Tooele Army Depot में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की प्रोसेसिंग और सेपरेशन फैसिलिटी लगाएगी. यहां तैयार सामग्री का एक हिस्सा मिलिट्री इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखा जाएगा.

टाइटन माइनिंग को अर्कांसस के Pine Bluff Arsenal और अलबामा के Anniston Army Depot में ग्रेफाइट प्यूरिफिकेशन प्लांट लगाने की जिम्मेदारी मिली है. वहीं EnergyX लिथियम प्रोसेसिंग यूनिट और Ioneer बोरॉन प्रोसेसिंग प्लांट विकसित करेगी. रेयर अर्थ मिनरल्स, लिथियम और ग्रेफाइट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, मोबाइल फोन, कंप्यूटर चिप, मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट्स और एडवांस्ड डिफेंस इक्विपमेंट में होता है. विशेष रूप से टर्बियम और डिस्प्रोसियम जैसे हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स हीट-रेजिस्टेंट मैग्नेट बनाने में इस्तेमाल होते हैं, जो डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता बना मिनरल सेक्टर

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में महत्वपूर्ण खनिजों में घरेलू उत्पादन बढ़ाना प्रमुख नीति बन गया है. इसी दिशा में अमेरिका ने 12 अरब डॉलर का स्ट्रैटेजिक मिनरल रिजर्व बनाने की योजना भी शुरू की है. इसके अलावा सरकार ने कई कंपनियों को करोड़ों डॉलर के लोन और फाइनेंशियल सपोर्ट देने की घोषणा की है. हाल के वर्षों में चीन और पश्चिमी देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. चीन ग्लोबल रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है. हाल ही में चीन ने कुछ अमेरिकी रेयर अर्थ कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल भी लगाया है. ऐसे में अमेरिका अपनी सप्लाई चेन को घरेलू स्तर पर सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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