EPFO के निवेश घोटाले मामले में अनिल अंबानी के खिलाफ FIR दर्ज, जानें क्या है आरोप

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली से मिली लिखित शिकायत के आधार पर शुक्रवार (31 जुलाई) को मुंबई स्थित रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL), उसके पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, अज्ञात लोक सेवकों और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार जैसे अपराधों के जरिए ईपीएफओ को 1,007.55 करोड़ का गलत वित्तीय नुकसान पहुंचाया. इसके अलावा 808.67 करोड़ की ब्याज देनदारी भी उत्पन्न हुई. इस प्रकार कुल कथित नुकसान 1,816.22 करोड़ का बताया गया है.
2,500 करोड़ का निवेश
सीबीआई के मुताबिक , वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी किए थे. इनमें ईपीएफओ ने रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड सहित चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के माध्यम से 2,500 करोड़ का निवेश किया था. इन एनसीडी की परिपक्वता अवधि वर्ष 2023 और 2024 में थी.
1,816.22 करोड़ का नुकसान
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन और धन के कथित दुरुपयोग (फंड डायवर्जन) में संलिप्त होकर ऐसी स्थिति पैदा की, जिसके कारण रिलायंस कैपिटल लिमिटेड एनसीडी का भुगतान (रिडेम्प्शन) करने में विफल रही. इससे ईपीएफओ को ₹1,816.22 करोड़ का कुल कथित नुकसान हुआ.
मामले की तफ्तीश में जुटी CBI
सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच के दौरान सभी संबंधित व्यक्तियों, जिनमें लोक सेवक और निजी व्यक्ति शामिल हैं, की भूमिका की पड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही कथित आपराधिक साजिश की जांच और निवेश की गई राशि के अंतिम उपयोग (एंड यूज़) का पता लगाया जाएगा.
सीबीआई ने यह भी बताया कि इससे पहले विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एलआईसी से प्राप्त शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) के खिलाफ भी सात FIR दर्ज की जा चुकी हैं.
सात आरोपी गिरफ्तार
इन मामलों में अब तक चार आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किए जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इन मामलों की जांच जारी है और इसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा रही है. सीबीआई ने कहा है कि वह इन मामलों की तेज, निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए प्रतिबद्ध है.











