अबूझमाड़ में बदली तस्वीर, जहां तिरंगे से डरते थे ग्रामीण वहां पहली बार शान से लहराया राष्ट्रीय ध्वज

अबूझमाड़ के बोटेर गांव में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना। जिस इलाके में कभी नक्सलियों के फरमान के कारण तिरंगा फहराना भी खतरे से खाली नहीं था, वहीं अब ग्रामीणों और बच्चों ने सुरक्षाबलों के साथ पूरे उत्साह से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। हाथों में तिरंगा लिए बच्चों के चेहरों पर खुशी और ग्रामीणों में देशभक्ति का उत्साह नजर आया।

कभी नक्सली फरमान से सहमा रहता था गांव

बोटेर और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक नक्सलियों का प्रभाव रहा। राष्ट्रीय पर्व के दौरान तिरंगे की जगह काला झंडा लगाने के फरमान दिए जाते थे। तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले ग्रामीणों को हिंसा का सामना करना पड़ता था। इसके चलते आजादी का पर्व भी लोगों के लिए खुशी के बजाय डर का दिन बन गया था।

सुरक्षा अभियान के बाद बदला माहौल

21 मई 2025 को ऑपरेशन कगार के तहत सुरक्षाबलों ने इलाके में बड़ा अभियान चलाया था। करीब 50 घंटे तक चले अभियान में नक्सली नेता केशव राव उर्फ बसवराजू समेत 27 नक्सली मारे गए थे। इसके बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई और नया पुलिस कैंप स्थापित हुआ। सुरक्षा बढ़ने के साथ ग्रामीणों के बीच नक्सलियों का डर कम हुआ। अब बोटेर में ग्रामीण विकास, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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