हेडलाइट को लेकर सरकार का बड़ा बदलाव, बाइक से लेकर कार तक पर पड़ेगा असर

सड़क पर रात के समय तेज रोशनी वाली हेडलाइट से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए सरकार वाहन लाइटिंग नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है. नए नियम लागू होने के बाद वाहनों के ऑटोमैटिक हेडलाइट (खासतौर पर नए दोपहिया वाहनों) के काम करने का तरीका बदल सकता है. इसके अलावा हाई-इंटेंसिटी वाली हेडलाइट की मैक्सिमम इंटेंसिटी लाइट पर भी सख्ती की जाएगी.

ऑटोमैटिक हेडलाइट अब सिर्फ Low Beam पर

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप On यानी AHO सिस्टम एक्टिव होने पर हेडलैंप केवल पासिंग बीम यानी Low Beam पर चलेगा. फिलहाल AHO सिस्टम वाहन की सेटिंग के आधार पर Low Beam और High Beam के बीच स्विच कर सकता है. नए प्रस्ताव के बाद ऑटोमैटिक सिस्टम एक्टिव रहने पर हेडलाइट Low Beam पर ही रहेगी.

ये नियम सड़क पर पहले से चल रहे दोपहिया वाहनों पर लागू नहीं होगा. इसका असर नए वाहनों पर पड़ेगा. मंत्रालय का मानना है कि Low Beam के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद समस्या बनी हुई है. ऐसे में नियम के जरिए हाई Beam के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने की कोशिश की जा रही है.

हाई-इंटेंसिटी हेडलाइट की सीमा होगी कम

सरकार ने वाहनों की हाई-इंटेंसिटी हेडलाइट के लिए मैक्सिमम इंटेंसिटी लाइट की लिमिटेशन को घटाने का भी प्रस्ताव रखा है. दो पहिया वाहनों में ये लिमिटेशन मौजूदा 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है. वहीं कार समेत चार पहिया वाहनों के लिए लिमिट 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला की जा सकती है. आपको बता दें कि कैंडेला (cd) रोशनी की तीव्रता मापने की आधिकारिक इकाई है.

इस बदलाव का मकसद सामने से आने वाले वाहन चालकों को तेज रोशनी से होने वाली परेशानी और अस्थायी रूप से कम दिखाई देने की समस्या को कम करना है.

हेडलाइट के कलर पर भी लगेगी लिमिट

ड्राफ्ट में हेडलैंप और फ्रंट फॉग लैंप से निकलने वाली रोशनी के कलर टेम्परेचर को लेकर भी नियम प्रस्तावित किए गए हैं. अधिकतम कलर टेम्परेचर 6,500 केल्विन निर्धारित करने का प्रस्ताव है. प्रस्ताव में कहा गया है कि ज्यादा कलर टेम्परेचर वाली व्हाइट लाइट तेज ग्लेयर पैदा कर सकती है. इससे सामने से आने वाले वाहन चालकों को असुविधा होने के साथ उनकी विजिबिलिटी भी प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा Main Beam हेडलैंप की माउंटिंग हाइट को पासिंग बीम हेडलैंप के लिए निर्धारित हाइट के समान रखने का प्रस्ताव भी है.

शहर में High Beam करने पर कार दे सकती है चेतावनी

नए प्रस्ताव में हाई बीम के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने के लिए ऑडियो अलर्ट जैसी व्यवस्था का भी प्रावधान हो सकता है. अगर कोई ड्राइवर शहरी इलाके में मैनुअली हाई बीम ऑन करता है, तो गाड़ी उसे लो बीम पर वापस जाने के लिए ऑडियो चेतावनी दे सकती है. हालांकि ये चेतावनी स्पीड सेंसेटिव होगी. हाईवे पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलने वाली गाड़ी को ये अलर्ट नहीं मिलेगा. इसकी वजह बताई जा रही है कि कम रोशनी वाले हाईवे पर हाई बीम की जरूरत पड़ सकती है. यानी प्रस्तावित सिस्टम शहरों में अनावश्यक हाई बीम को कम करने की कोशिश करेगा, लेकिन हाईवे पर ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर को अलर्ट बेजकर परेशान नहीं करेगा.

बस और भारी वाहनों पर Reflective Tape जरूरी

प्रस्तावित बदलाव सिर्फ हेडलाइट तक लिमिटेड नहीं हैं. बसों और दूसरे भारी वाहनों में Genuine Reflective Tapes के इस्तेमाल को भी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. इसका मकसद रात और खराब मौसम के दौरान इन बड़े वाहनों को दूसरे वाहन चालकों के लिए ज्यादा आसानी से दिखाई देने एलिजिबल बनाना है. ड्राफ्ट में अलग-अलग वाहन कैटेगरी के लिए लाइटिंग की जरूरत को भी अपडेट किया गया है. इसमें Adaptive Passing Beam और Adaptive High Beam जैसे आधुनिक लाइटिंग सिस्टम के लिए भी नियम शामिल हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close