राजस्थान में जल संकट एक बहुत बड़ी समस्या है. राज्य के कुल क्षेत्रफल और पानी की उपलब्धता में भारी अंतर है. यहां बारिश भी अन्य राज्यों के मुकाबले कम होती है. इसके चलते भूजल स्तर में भी भारी गिरावट आ रही है. इस बीच राजस्थान सरकार ने 10 दिनों के भीतर पहले यमुना जल समझौते के एमओयू पर साइन किए. फिर नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद को लेकर हुए समझौते के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं. दोनों ही समझौतों से राजस्थान की तकरीबन 1.20 करोड़ की आबादी को लाभ मिलेगा. यानी सिर्फ 10 दिनों के अंदर ही राजस्थान सरकार ने 1.20 करोड़ लोगों के लिए पानी की व्यवस्था कर दी है.
केंद्र सरकार की पहल पर राजस्थान, गुजरात , मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के बीच 47 साल से चला आ रहा नर्मदा भुगतान विवाद 7 जुलाई को आखिरकार सुलझ गया है. इस समझौते के साथ ही इन 4 राज्यों के बीच चली 5 दशकों से चली आ रही वित्तीय अनिश्चतता भी कम खत्म हो गई है. एमपीकेसी यानी पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते के बाद नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद का सुलझना राजस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
दोनों जल समझौते से जुड़ी ये फैक्ट्स भी जानें
- राजस्थान ने सिर्फ 10 दिन में दो समझौते कर 1.20 करोड़ लोगों के लिए पानी की व्यवस्था की
- नर्मदा परियोजना से पश्चिमी राजस्थान तो यमुना जल समझौते से शेखावटी क्षेत्र को मिलेगा लाभ
- सिंचाई की समस्या खत्म होने से इन क्षेत्रों की कृषि अर्थव्यवस्था में सुधार की गुंजाइश
- इन क्षेत्रों के भूजल स्तर में आएगा सुधार
राजस्थान की कितनी आबादी को नर्मदा विवाद सुलझने का मिलेगा लाभ?
2011 की जनगणना के अनुसार, बाड़मेर जिले की कुल आबादी 26,03,751 है. वहीं, जालौर जिले की कुल जनसंख्या 18,28,730 है. ऐसे में दोनों जिलों की तकरीबन 45 लाख की आबादी को इस नर्मदा घाटी परियोजना का लाभ मिलेगा ही, साथ ही पाली और सिरोही के कुछ क्षेत्रों को भी इसका फायदा मिलने जा रहा है. इन क्षेत्रों अगर अनुमानित आबादी हम 6 से 8 लाख मानकर चलते हैं, तो इस परियोजना से कुल 50 से 53 लाख आबादी को लाभ मिलने जा रहा है.
क्या था नर्मदा अवार्ड विवाद और कितने लंबे समय से चला आ रहा था?
इस विवाद की शुरुआत साल 1979 के नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड के बाद शुरू हुआ. न्याधिकरण ने उस दौरान ‘ नर्मदा घाटी परियोजना के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा नदी के जल का बंटवारा तय किया था. इस दौरान mरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य खर्चों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात की हिस्सेदारी तय की गई थी. लेकिन समय के साथ परियोजना की बढ़ती लागत और भुगतान को लेकर चारों राज्यों में विवाद गहरा गया.
नर्मदा विवाद सुलझने से चारों राज्यों को क्या मिला?
47 सालों से चारों राज्य एक दूसरे के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये के दावे करते रहे. इससे यह विवाद और गहराता चला गया. लेकिन अब केंद्र सरकार की पहल पर लंबित भुगतान और निर्माण लागत चारों राज्यों की तरफ से एमओयू साइन कर दिया गया है. इसके तहत मध्य प्रदेश , राजस्थान और महाराष्ट्र की तरफ से गुजरात को 1650 करोड़ रुपये मिलेंगे. तीनों ही राज्यों द्वारा गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा. यह भुगतान वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए किया जाएगा. इस विवाद के सुलझने से राजस्थान को कुल 616.74 MCM पानी मिलेगा. वहींस महाराष्ट्र को उसके हिस्से का 10 टीएमसी पानी मिलेगा. मध्य प्रदेश में भी जल और बिजली की निर्बाध उपलब्ध होगा.
जून महीने में राजस्थान किया था हरियाणा के साथ यमुना जल समझौता
इसी साल 28 जून को 32 साल से राजस्थान के बीच चला आ रहा यमुना बेसिन जल समझौते का विवाद भी सुलझ गया. 28 जून को केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भजनलाल शर्मा ने यमुना जल समझौते के एमओयू पर साइन किए. इस समझौते के मुताबिक हरियाणा हथिनीकुंड बैराज से अंडरग्राउंड पाइप लाइन के सहारे राजस्थान में यमुना का पानी पहुंचाया जाना है.
यमुना जल समझौते से राजस्थान की कितनी आबादी को लाभ मिलेगा?
राजस्थान को 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिलेगा. लेकिन यह पानी हरियाणा की तरफ से सिर्फ जुलाई से लेकर अक्टूबर के बीच दिया जाएगा. इस पानी को पहुंचाने के लिए हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से शुरू होकर राजस्थान के चुरू जिले के हंसियावास जलाशय तक जाएगी. परियोजना पर तकरीबन 3900 करोड़ रुपए खर्च आएगा. इसे राजस्थान और हरियाणा सरकारें मिलकर वहन करेंगी.
- यमुना जल समझौते से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों को फायदा मिलेगा.
- सीकर जिले में 26.77 लाख, झुंझनू में 21.37 लाख, चुरू 20.39 लाख आबादी है
- इस जल समझौते से शेखावटी क्षेत्र कहलाने वाले इस इलाके के 68 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा
- कृत्रिम जलाशयों और एक आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली का भी निर्माण किया जाएगा.
- इससे पीने के पानी के साथ-साथ किसानों की सिंचाई की समस्या सुलझेगी
32 साल से राजस्थान को क्यों नहीं मिला था यमुना का पानी?
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के बीच यमुना बेसिन नाम का एक समझौता साल 1994 में किया गया था. समझौते के तहत यमुना नदी के सालाना उपलब्ध जल प्रवाह को सभी राज्यों के बीच आनुपातिक तौर पर डिवाइड करना था. हरियाणा को 40.6%, उत्तर प्रदेश को 35.1%, राजस्थान को 10.4%, दिल्ली को 6.3% और हिमाचल प्रदेश को 1.7% यमुना का पानी दिया जाना था. लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी और जल बंटवारे के किसी स्पष्ट व पारदर्शी तंत्र की उपलब्धता नहीं होने के चलते राजस्थान को उसके हिस्से का पानी नहीं मिल पाया.