यमुना छठ पर ये 5 आम गलतियों से बचें, नहीं तो हो सकते हैं अशुभ परिणाम

चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी के साथ-साथ यमुना छठ को भी समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी यमुना पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. विशेषकर मथुरा और वृंदावन में इस दिन की रौनक देखते ही बनती है. इस दिन भक्त सुबह स्नान कर यमुना जी की पूजा करते हैं, पीले वस्त्र धारण करते हैं और फल-मिठाई का भोग लगाते हैं. शाम को विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है.लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस पावन दिन पर कुछ गलतियां आपके पुण्य को कम कर सकती हैं?
कब है यमुना छठ?
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 23 मार्च 2026 को शाम 6 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगी और 24 मार्च 2026 को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर बजे समाप्त होगी. उदया तिथि को मानते हुए यमुना जयंती 24 मार्च को धूमधाम से मनाई जाएगी.
यमुना छठ पर भूलकर भी न करें ये गलतियां!
नदी में गंदगी फैलाना
यमुना छठ के दिन यमुना स्नान का विशेष महत्व होता है. ऐसे में नदी में कूड़ा-कचरा या प्लास्टिक डालना अशुभ माना जाता है. यह न केवल धार्मिक रूप से गलत है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है.
बिना स्नान के पूजा करना
पूजा से पहले शुद्ध स्नान करना जरूरी माना गया है. बिना स्नान किए पूजा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता.
काले या गंदे कपड़े पहनना
इस दिन पीले या साफ-सुथरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. काले या गंदे कपड़े पहनने से सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है.
तामसिक भोजन का सेवन न करें
इस दिन मांस, शराब, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए. सात्विक आहार ही ग्रहण करें.
यमुना छठ का धार्मिक महत्व
यमुना छठ जिसे यमुना जन्मोत्सव भी कहा जाता है हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी यमुना भगवान सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन हैं. यमुना जी को भगवान श्री कृष्ण की सबसे प्रिय पटरानी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन यमुना में स्नान करने से व्यक्ति के अनजाने में किसी गए सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.









