महादेव बेटिंग ऐप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: कारोबारी विकास गर्ग दिल्ली से गिरफ्तार, रायपुर लाकर होगी पूछताछ

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी विकास गर्ग को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उसे 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर ईडी को सौंप दिया है। एजेंसी अब उसे रायपुर लाकर विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश करेगी और पूछताछ के लिए कस्टोडियल रिमांड की मांग करेगी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय शंकर ने विकास गर्ग को रायपुर ले जाकर विशेष अदालत में पेश करने की अनुमति दी है। ईडी की टीम उससे महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका के संबंध में पूछताछ करेगी।
जांच एजेंसी के अनुसार, विकास गर्ग की कंपनियों से जुड़ी करीब 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं। ईडी का आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित अवैध धन को शेल कंपनियों और कई स्तर के वित्तीय लेन-देन के जरिए वैध दिखाने का प्रयास किया गया। बाद में इसी रकम से शेयर, निवेश और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं।
ईडी ने इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दर्ज एफआईआर के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में दर्ज मामलों के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट विदेश से फ्रेंचाइजी आधारित पैनल नेटवर्क के जरिए संचालित किया जा रहा था। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क से हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध कारोबार किया जा रहा था।
इस मामले में हाल ही में महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर को भी ओमान में गिरफ्तार किया गया था। उस पर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से संयुक्त अरब अमीरात में रह रहा था और भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
ईडी के मुताबिक, इस मामले में अब तक सात बार संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं और रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में कई अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की गई हैं। अदालत इस मामले में संज्ञान ले चुकी है। एजेंसी ने बताया कि अब तक महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज बेटिंग नेटवर्क से जुड़ी करीब 3,800 करोड़ रुपये मूल्य की चल-अचल और विदेशी संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है।











