ग्लोबल तनाव के बीच रूस को बड़ा झटका, एक्सपोर्ट में 40% की गिरावट

जहां एक ओर ईरान और इजराइल के बीच युद्ध लगातार जारी है. वहीं, रूस को तगड़ा झटका लग गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के ड्रोन हमलों, एक बड़ी पाइपलाइन पर विवादित हमले और टैंकरों को जब्त किए जाने के बाद रूस की तेल निर्यात क्षमता का कम से कम 40% हिस्सा बंद हो गया है.

यह रुकावट रूस के आधुनिक इतिहास में तेल सप्लाई में अब तक की सबसे गंभीर परेशानी है. रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और इस रुकावट ने मॉस्को को ठीक ऐसे समय पर झटका दिया है, जब ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. रूस का तेल उत्पादन राष्ट्रीय बजट के लिए कमाई के मुख्य स्रोतों में से एक है और $2.6 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

यूक्रेन ने बढ़ाए हमले

यूक्रेन ने इस महीने रूस के तेल और ईंधन निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. इन हमलों में रूस के तीनों प्रमुख पश्चिमी तेल निर्यात बंदरगाहों को निशाना बनाया गया है, जिनमें काला सागर पर स्थित नोवोरोस्सिय्स्क और बाल्टिक सागर पर स्थित प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा शामिल हैं.

रॉयटर्स की गणना के अनुसार, सबसे हालिया हमले के बाद बुधवार तक रूस की कच्चा तेल निर्यात क्षमता का लगभग 40% हिस्सा यानी करीब 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन बंद हो गया था. इसमें प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा के साथ-साथ द्रुजबा पाइपलाइन भी शामिल है, जो यूक्रेन से होते हुए हंगरी और स्लोवाकिया तक जाती है.

कीव ने पाइपलाइन के तेल पंपिंग स्टेशनों और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है. कीव का कहना है कि उसका उद्देश्य मॉस्को की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करना है. जो रूस के सरकारी बजट की आय का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है और उसकी सैन्य ताकत को कमजोर करना है. रूस का कहना है कि यूक्रेन के ये हमले आतंकवादी हमले हैं, और उसने अपने 11 टाइम ज़ोन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.

बंदरगाह, पाइपलाइनें और टैंकर

यूक्रेन ने कहा कि जनवरी के अंत में रूस के हमलों के कारण द्रुजबा पाइपलाइन का कुछ हिस्सा खराब हो गया था, जिसके बाद स्लोवाकिया और हंगरी दोनों ने कीव से तुरंत सप्लाई फिर से शुरू करने की मांग की थी. नोवोरोस्सिय्स्क तेल टर्मिनल, जिसकी क्षमता 700,000 बैरल प्रतिदिन तक तेल संभालने की है, इस महीने की शुरुआत में यूक्रेन के एक बड़े ड्रोन हमले से हुई क्षति के बाद से योजना के अनुसार तेल लोड नहीं कर पा रहा है.

इसके अलावा व्यापारियों ने बताया कि यूरोप में रूस से जुड़े टैंकरों को बार-बार ज़ब्त किए जाने के कारण, मुरमान्स्क बंदरगाह से होने वाले 300,000 बैरल प्रतिदिन के आर्कटिक तेल निर्यात में रुकावट आ गई है. पश्चिम की ओर जाने वाले अपने एक्सपोर्ट रास्तों पर खतरे को देखते हुए, मॉस्को को एशियाई बाजारों में तेल एक्सपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ रहा है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि क्षमता की कमी के कारण ये रास्ते सीमित हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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