जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, 5 जिले टॉप-10 में शामिल; कोरिया का 5% मॉडल बना मिसाल

छत्तीसगढ़ ने बारिश की हर बूंद को सहेजने और भू-जल स्तर बढ़ाने के प्रयासों में देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘कैच द रेन’ सत्र में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

जल संरक्षण को बनाया जनअभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं या जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा गया है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़कर इसे जनअभियान का रूप दिया गया है।

उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण वे खेती और ग्रामीण जीवन में पानी के महत्व को करीब से समझते हैं। किसान के लिए पानी उसकी फसल, आजीविका और भविष्य से जुड़ा संसाधन है। इसी सोच के साथ जल संरक्षण के प्रयासों के केंद्र में किसान और गांवों को रखा गया है।

कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल बना उदाहरण

कोरिया जिले में शुरू किया गया ‘5 प्रतिशत मॉडल’ किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया है। इसके तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं।

इस जमीन पर ऐसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे बारिश का पानी खेतों से बाहर बहने के बजाय वहीं रुक सके और धीरे-धीरे जमीन में समा सके। इस मॉडल में किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण अभियान के सक्रिय भागीदार हैं।

जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, मॉनिटरिंग और नियमित समीक्षा के साथ पंचायतों, जल सखियों और जल मित्रों को भी अभियान से जोड़ा गया है।

तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ नंबर-1

‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के पहले चरण में प्रदेश में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गई थीं। इस चरण में राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा था। दूसरे चरण में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 23 लाख 7 हजार 768 का काम पूरा हो चुका है।

अब तीसरे चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 77 हजार 719 संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है। इसी प्रदर्शन के आधार पर छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।

पांच जिले टॉप-10 में

राज्य की उपलब्धि के साथ पांच जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कार्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ाया गया है।

पानी की कमी वाले ब्लॉक घटे

जल संरक्षण के प्रयासों के बीच राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

प्रदेश में पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और नियमित निगरानी पर भी जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने दिए राष्ट्रीय स्तर पर सुझाव

मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि हर राज्य को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, बारिश के स्वरूप और भू-जल स्थिति के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव भी दिया।

उन्होंने जल संरचनाओं की मैपिंग को मजबूत करने और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा करने की बात कही। उनका कहना है कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी के समन्वय से जल संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल इस लक्ष्य को हासिल करने में उपयोगी साबित हो सकता है। खेतों और गांवों में बारिश का पानी रोकने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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