बारिश में बह गए करोड़ों के बांध, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल; जांच में सामने आएगी नींव की हकीकत

लगातार बारिश के बीच करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए सिंचाई बांधों के बहने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। दस दिनों के भीतर अलग-अलग इलाकों में तीन जल संरचनाओं के टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कहीं पुराने बांध तो कहीं चूहों के बिल को पानी रिसने की वजह बताया गया, लेकिन जांच में बांधों की नींव की मजबूती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नींव की गुणवत्ता पर सबसे बड़ा सवाल
जल संरचनाओं में फाउंडेशन यानी नींव को सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पड़ताल में सामने आया कि कुछ स्थानों पर नींव को डिजाइन के निर्धारित स्तर तक गहराई देने और तेज बहाव का दबाव सहने के लिए जरूरी मानकों का पालन नहीं किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार नींव तैयार करने के बाद उपयुक्त मिट्टी से भराई और उसकी मजबूती सुनिश्चित करना जरूरी होता है, जबकि कुछ जगहों पर स्थानीय मिट्टी से ही बेस तैयार किए जाने की बात सामने आई है। इससे बारिश के दौरान बांधों की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
दस दिनों में तीन बांधों को नुकसान
मनैगांव-बिरसिंगे-भरतपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मसरा स्थित अमझुड़ी बांध भारी बारिश के दौरान टूट गया। वहीं बलरामपुर जिले में जल ग्रहण मिशन के तहत बनाया गया तेतराई बांध करीब आठ दिन पहले क्षतिग्रस्त हुआ। इससे खेतों में पानी भरने के कारण धान की फसल को नुकसान हुआ। इसके अलावा कौरिया जिले के छोटे सासली में करीब 1.5 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया बांध लगभग 15 दिन पहले फूट गया था।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अनिल खलावो के मुताबिक कई टैंक पुराने हो चुके हैं और बारिश के दौरान इनके बहने की घटनाएं हुई हैं। सभी मामलों की जांच कराई जा रही है।
चूटी बांध को क्षतिग्रस्त हुए करीब एक साल बीतने के बावजूद सुधार कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है और मंजूरी मिलने के बाद सुधार कराया जाएगा।
चूहों के बिल को बांध टूटने की वजह बताए जाने पर मुख्य अभियंता ने कहा कि बिल किसके हैं, यह किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि बहने वाले बांधों और एनीकट की जांच कराई जा रही है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।











