छत्तीसगढ़ PG मेडिकल एडमिशन 2025: पहला राउंड का सीट आबंटन जारी, कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेगा एडमिशन

छत्तीसगढ़ राज्य में 2025 शैक्षणिक सत्र के PG मेडिकल प्रवेश के तहत राज्य कोटा की प्रथम चरण काउंसलिंग का सीट आबंटन कर दिया गया है। राज्य काउंसलिंग समिति ने यह निर्णय अभ्यर्थियों के हित और केंद्रीय चिकित्सा परामर्श समिति (MCC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तय समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए लिया है।

हालांकि PG प्रवेश से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। समृद्धि दुबे बनाम छत्तीसगढ़ राज्य प्रकरण में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर से स्पष्टीकरण मांगा है। ऐसे में राज्य काउंसलिंग समिति ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सीट आबंटन अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

फर्स्ट राउंड की काउंसलिंग में कुल 273 अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं। इसमें 136 स्टेट इंस्टिट्यूशन कोटा, 135 स्टेट ओपन कोटा, 1 NRI इंस्टिट्यूशन कोटा और 1 NRI ओपन कोटा से उम्मीदवार शामिल हैं। अधिकांश उम्मीदवार राज्य के ही संस्थानों से पढ़े हुए हैं, जबकि कुछ बाहरी राज्यों से पढ़े हुए हैं। छत्तीसगढ़ पहला ऐसा राज्य है जहां प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में SC/ST/OBC उम्मीदवारों को रिजर्वेशन दिया गया है।

PG काउंसलिंग और कोर्ट केस से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:

  • राज्य कोटा PG काउंसलिंग का पहला चरण जारी: सीट आबंटन प्रक्रिया शुरू।
  • MCC की समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए फैसला: निर्धारित डेडलाइन के अनुसार काउंसलिंग जारी।
  • सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल: समृद्धि दुबे बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में राज्य सरकार ने SLP दायर की।
  • हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के अनुच्छेद 21 पर स्पष्टीकरण मांगा।
  • सीट आबंटन अंतिम फैसले के अधीन: कोर्ट के अंतिम आदेश के अनुसार सीटों में संशोधन या पुनः आबंटन संभव।

एक अन्य मामला (WPC 6449/2025: प्रभाकर चंद्रवंशी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य) मार्च 2026 तक हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस कारण काउंसलिंग समिति ने चेतावनी दी है कि वर्तमान राउंड में किया गया हर सीट आबंटन न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

छात्रों के लिए जरूरी निर्देश:

  • सीट मिलने के बावजूद एडमिशन पूरी तरह फाइनल नहीं माना जाएगा।
  • कोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य कोटा प्रतिशत में बदलाव संभव।
  • देरी होने पर जीरो ईयर का खतरा बना रह सकता है।
  • अभ्यर्थियों को अगले नोटिस तक सतर्क रहना होगा।