कांग्रेस का बिजली बिल पर हल्लाबोल: समर्थन पत्र अभियान से सरकार को घेरने की रणनीति तैयार

छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों में हो रही लगातार वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, जबकि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां अपनाई जा रही हैं।
कांग्रेस इसके खिलाफ आंदोलन कर रही है। जुलाई में कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों के घर-घर जाकर समर्थन फार्म भरवाएंगे। आगामी मानसून सत्र में सरकार को सदन में इस पर जवाब देना होगा।
तीन चरणों में कांग्रेस कर रही प्रदर्शन
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीन चरणों में प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की थी। पार्टी की रणनीति के अनुसार 17 जून को सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव किया गया और मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
18 जून को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस अपना पक्ष जनता के सामने रख। वहीं तीसरा चरण जुलाई के पहले सप्लाई में शुरु होगा।
जुलाई के पहले सप्ताह में कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर स्मार्ट मीटर हटाने के समर्थन में आवेदन और समर्थन पत्र भरवाएंगे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बैज ने कहा कि प्रदेश में बिजली बिल उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी समस्या बन गया है।
लोग बिल सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो यह नाराजगी बड़े जन आंदोलन में बदल सकती है।
उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही बीजेपी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर और अन्य बिजली योजनाएं बड़े कॉर्पोरेट समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई जा रही हैं, जिससे आम उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मानसून सत्र में विधानसभा में घेरेंगे
पार्टी ने घोषणा की है कि आगामी मानसून सत्र में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार से जवाब मांगेंगे।
कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और खाद की कीमतों के साथ बिजली दरों में वृद्धि भी बड़ा मुद्दा बनेगा।
भाजपा सरकार ने पांच बार बिजली बढ़ाई
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक पांचवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता और किसान प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं स्मार्ट मीटर को लेकर भी बिल बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी सवाल बन गया है।











